कपड़े बेचने वाले के बेटे ने तय किया आईएएस पद तक का सफर, IAS अनिल बसाक की कहानी

आज हम आपको कहानी बताएंगे बिहार के किशनगंज (Kishanganj, Bihar) के छोटे से गांव खारुदाह के रहने वाले आईएएस अनिल बासक (IAS Anil Basak) की। अनिल बासक का जन्म 2 अगस्त 1995 को हुआ। अनिल बसाक का आईएएस बनने तक का सफर बेहद मुश्किल रहा, उनके पिता गली-गली घूमकर कपड़े बेचने का काम करते थे।

अनिल की पढ़ाई

मिली जानकारी के मुताबिक आईएएस अफसर अनिल बसाक की पढ़ाई आठवीं कक्षा तक ओरिएंटल पब्लिक स्कूल किशनगंज (Oriental Public School, Kishanganj) से हुई। दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई उन्होंने अररिया पब्लिक स्कूल (Arriya Public School) और बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई बाल मंदिर विद्यालय से की थी। इसके बाद अनिल का चयन 2014 में आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) में हो गया और उन्होंने 2014 में दिल्ली में इंजीनियरिंग (Engineering) की पढ़ाई के लिए दाखिला ले लिया। 2018 में इंजीनियरिंग पास करने के बाद अनिल के पास नौकरी का विकल्प बचा था, लेकिन इसके बाद उन्होंने पढ़ाई को जारी रखा।

IAS Anil Basak

पिता बेचते थे कपड़े,दूसरे प्रयास में बने अफसर

अनिल बसाक के पिता एक व्यापारी के यहां काम किया करते थे। वह गली-गली घूमकर कपड़े बेचने (Cloth Seller) का काम करते थे। अनिल बताते हैं कि जब उनके पिता के कपड़े बेचते थे, तब ही उनका दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो पाता था। जिस दिन उनके पिता कपड़े नहीं बेच पाते थे,तब दिन का भोजन भगवान के सहारे हो जाता था। अनिल बासक कहते थे कि उन्होंने कड़ी मेहनत की,उनके पिता के आशीर्वाद से आज उन्होंने इस मुकाम को पाया है। जानकारी के लिए बता दे अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी (UPSC Clears in 2nd Attempt) की परीक्षा को पास कर लिया था और वह आईआरएस अफसर के तौर पर आयकर आयुक्त (Income Tax) में नौकरी करने लगे थे। लेकिन इसके बाद भी अनिल बसाक ने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास (UPSC in 3rd Attempt) में ऑल इंडिया 45वी रैंक (AIR 45) हासिल करके आईएएस बनने के सपने को पूरा किया है।

क्या कहते है अनिल

अनिल बासक कहते हैं कि एक वक्त के लिए उन्हें पाई पाई का मोहताज होना पड़ा था। वे कहते हैं कि उनकी पढ़ाई में स्कॉलरशिप (Scholarship) का बहुत बड़ा योगदान (Contribution) रहा अनिल कहते हैं कि उनके जीवन की परिस्थितियां बेहद कठिन थी और उन्हीं परिस्थितियों ने उन्हें मजबूत बनाया है। साथ में वह कहते है कि समय ने उनकी परीक्षा ली और ताकत भी दी। अनिल अपनी कामयाबी के पीछे अपने पिता को उसका श्रेय देते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि उनके पिता विनोद बसाक की मेहनत और परिवार के सहयोग से आज वह अपने सपने को पूरा कर पाए हैं।

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