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भागलपुर

बिहार के पुलिस वाले चाचा की ‘चलता पाठशाला’ जहाँ मिलती गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा

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जब आप किसी से पूछेंगे की देश में सबसे सस्ता या मुफ्त में क्या उपलब्ध होना चाहिए तो ज्यादातर लोग शिक्षा का नाम लेगे। ऐसे कई उदाहरण है जो लोग इसी क्षेत्र में दिन रात मेहनत कर रहे है। कुछ लोग कोशिश कर रहे है कि लोगों तक शिक्षा को पहुचाया जा सके। आज की कहानी है बिहार भागलपुर के सचिन पासवान की। सचिन पासवान बिहार भागलपुर में चौकीदार यानी कॉन्स्टेबल है।

सचिन ड्यूटी के साथ एक नेक काम कर रहे हैं। नेक काम है चलता पाठशाला के जरिये बच्चों को पढ़ाने का।सचिन पासवान बताते हैं कि जब वह रेलवे स्टेशन के पास ड्यूटी कर रहे थे। तब उन्होंने बच्चों को खेलते हुए देखा जिसके बाद उन्होंने बच्चों से बातचीत की, बातचीत करने के बाद पता चला कि बच्चे पढ़ना चाहते हैं। लेकिन संसाधनों की कमी या जागरूकता की कमी की वजह से स्कूल नहीं जा पा रही हैं। इसके बाद सचिन ने एसएसपी आशीष भारती की मदद मिली और उन्होंने चलता पाठशाला खोली। चलता पाठशाला उन्होंने अपने अभियान का नाम दिया। जिसके बाद उन्होंने बच्चों को एकत्रित करके पढ़ाना शुरू किया।

पढ़ाई के साथ संसाधन भी उपलब्ध कराते हैं

अब हर रोज उनकी पाठशाला में 15 बच्चे पढ़ने आते हैं। बच्चों को किताबों के साथ अन्य चीजें भी उपलब्ध करवाई जाती है। भागलपुर नाथनगर थाने में कार्यरत सचिन ड्यूटी के बाद बच्चों को ककहरा सिखाते हैं। वह चाहते है कि बच्चों का भविष्य बना पाए।

पिता के निधन के बाद पढ़ाई बीच में रह गई

सचिन पासवान बताते हैं कि जब वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। उनके पापा चौकीदार थे। पिताजी के निधन होने के बाद सचिन के ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। जिम्मेदारी आने की वजह से सचिन आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए। लेकिन उनके मन में पढ़ने और पढ़ाने की इच्छा हमेशा से थी। जिसके बाद पिताजी के बदले उन्हें नौकरी मिल गई। नौकरी करते हुए उन्होंने स्टेशन में ड्यूटी करते हुए बच्चों को खेलते हुए देखा इसके बाद उनके मन में विचार आया कि बच्चों को पढ़ाया जा सकता है। सचिन बताते हैं कि उनकी पढ़ने पढ़ाने की इच्छा हो वह लॉक डाउन में पूरा कर रहे हैं।

बच्चो के पुलिस वाले चाचा

सचिन के इस नेक काम में उनके साथ ही कुंदन पासवान भी मदद कर रहे हैं। आसपास के बच्चे सचिन और कुंदन को पुलिस वाले चाचा के नाम से पुकारते हैं।

बिहार पुलिस की तरफ से मिला था मदद का पूरा आश्वाशन

वहीं बिहार पुलिस के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने भी सचिन और उनके साथी की तारीफ की थी। आपको बताएं जब गुप्तेश्वर पांडे को उनके बारे में पता लगा था तो डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने बिहार पुलिस की तरफ से मदद करने का पूरा आश्वासन दिया था। सचिन कहते हैं कि वह खुद ज्यादा नहीं पढ़ सके लेकिन उनकी पढ़ाने की इच्छा हमेशा से जीवित थी। वे चाहते हैं कि बच्चे पढ़ लिख कर के आगे नाम करें।

एक और जहां निजी स्कूलों में बच्चों से कई हजार रुपए फीस के तौर पर लिए जाते है। वहीं सचिन पासवान और उनके साथी कुंदन पासवान मुफ्त में बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। निस्वार्थ भाव से बच्चों की सेवा और शिक्षा देने का काम एक बेहतरीन काम है। सचिन की इस भावना और इस अभियान को हम सलाम करते हैं।

   
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