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पूर्वी चम्पारण

बिहार का प्रसिद्ध अंग्रेज़ों के ज़माने का लोहे के चक्का वाला ट्रैक्टर, 10 चक्का ट्रक से ज्यादा दमदार

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आज हम ऐसे चीज़ के बारे में बताने जा रहा है जो आपने जिंदगी में नहीं देखा होगा ऐसा नज़ारा, आपने सुना तो होगा ही ओल्ड इस गोल्ड तो उसी बात को चरितार्थ करते एक पुराने अंग्रेज़ों ज़माने के ट्रैक्टर के बारे में जो मॉडर्न ज़माने के ट्रैक्टर को टक्कर देते है। हम आज बात करेंगे पूर्वी चम्पारण के हरदिया कोठी में प्रसिद्ध अंग्रेज़ों के ज़माने के ट्रैक्टर के बारे में।

इस ट्रेक्टर की खास बात यह है कि इसमें ना टायर ना ट्यूब और ना ही हवा भरवाने का चक्कर है, इसमें लोहे के चक्के लगे जो कीचड़ हो या कहीं भी नहीं रुकते। इसका डिज़ाइन बहुत ही मजबूत और शानदार है जो आज के जमाने के ट्रेक्टर में नहीं मिला। यह ट्रैक्टर ईटा ज्यादा प्रसिद्ध है कि दूर दूर से देश विदेश से पर्यटक इसको देखने के लिए आते है और यहाँ पिकनिक मनाने आते है।इस ट्रैक्टर को बंद करने के पीछे का कारण यह था कि यह बहुत ज्यादा तेल पीता था जो गरीब तबके के किसान के लिए सम्भव नहीं हो सकता है। लेकिन इसकी ताकत का कोई जवाब नहीं है यह ट्रैक्टर गन्ना का 2 3 लोडेड ट्रेलर एक साथ खींच के ले जा सकता था। इस ट्रैक्टर में इतनी ताकत थी कि यह 50 तवा को खिंच कर खेत में जुताई के लिए काम में लिया जाता था।

वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक धरोहर के 50% सामान लोग खोल कर लेके चले गए लेकिन अभी भी इस धरोहर को देखने दुनिया से लोग आते है। 2008 के बाद इस ट्रैक्टर को बंद कर दिया गया।

अंग्रेज़ी हुकुमत के समय का चंपारण, हल्दिया कोठी में एक ऐसा ट्रेक्टर हैं जिसे देखने आस-पास ही नही बल्कि सैकडों किलोमीटर दूर से भी लोग आते हैं । वहां के लोग बताते हैं कि 1940 में ये ट्रेक्टर आया और आज भी इसका ढांचा खड़ा हैं ।ट्रेक्टर की मजबूती देख लोग दंग रह जाते हैं ।ट्रेक्टर चालक ” देवनंदन पासवान “के पुत्र बताते हैं कि पिता जी यही ट्रेक्टर चलाते थें और हमलोग खाना लेकर आते थें ।उस समय यह तीन चार ट्रेक्टर का लोड़ खींचता था। अंग्रेजी हुकूमत के समय यूरोप से इस ट्रेक्टर को मंगाया गया है ।

अंग्रेज़ी हुकुमत में बिहार में बड़े फार्मो पर खेती होती थी ।जिसके लिए इस बड़े ट्रेक्टर का इस्तेमाल किया जाता था ।अब इसके कुछ पार्टस को लोग खोल लिए हैं ।ट्रेक्टर मे लगा लोहा आज के लोहे से बेहद मजबूत हैं। ट्रेक्टर मे लोहे के चक्के को ऐसा बनाया गया है कि वह कीचड़ में भी चल सकता है ।भारी समान ,गन्ना इत्यादि ढोने के लिए अंग्रेज इसे लाएं थें फिर जब यहां से गए तो इसे छोड़ दिया ।आज यह ट्रेक्टर सुगौली मिल के पास है ।इस के तरह एक ट्रेक्टर और जो जिसमें टायर लगा हुआ है और वो आज भी संचालित हैं ।

इस अँगरेज़ के ज़माने के ट्रैक्टर के बारे में आपके क्या विचार है कमेंट बॉक्स में जरूर बताये

   
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