श्री राम का बेहद गहरा नाता रहा है बिहार के सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर से, जानें पूरी कहानी!

Bihar Someshwar Nath temple: चम्पारण के अरेराज में स्थित भगवान शिव को समर्पित ऐतिहासिक सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर उत्तर बिहार का सबसे प्राचीनतम एवं प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जो मोतिहारी से 28 किलोमीटर पर दक्षिण में गंडक नदी के किनारे स्थित है. भगवान सोमेश्वर नाथ का शिवलिंग पंचमुख है. जिसका दर्शन करने के लिये गर्भगृह में सीढ़ी से उतरकर जाना पड़ता है. इस महादेव मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण, पद्म पुराण, एवं वाराहपुराण में भी है.

कभी राम, द्रौपदी और युधिष्ठिर ने यहाँ की थी पूजा

bihar temple

बताया जाता है कि त्रेता युग में भगवान राम अपनी पत्नी सीता के साथ विवाह कर जनकपुर से अयोध्या लौटने के क्रम में यहाँ भगवान सोमेश्वर नाथ की पूजा की थी. आज भी इसी कारण हर वर्ष जनकपुर में अगहन की पंचमी को आयोजित होने वाले राम विवाह में अयोध्यावासी भाग लेते हैं और लौटते वक्त अरेराज मंदिर में जल चढ़ाते हैं. प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चिदानंद वात्सायन (अज्ञेय) की रचनाओं को आधार माने तो यहां द्वापर में अज्ञातवास के दौरान धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ यहां पूजा की थी. युधिष्ठिर राजपाट खोने पर इसी मंदिर पूरे श्रावण मास (Bihar Someshwar Nath temple) जलाभिषेक किया था, जिसके बाद उनका राजपाट वापस हुआ था.

शृंगार पूजन उत्स्व से प्रसन्न होते हैं बाबा भोलेनाथ

areraj temple

अरेराज के सोमेश्वर महादेव का श्रृंगार पूजन भव्य होता है.लगभग विलुप्त हो चुके पामरिया नृत्य के माध्यम से भगवान शिव को प्रसन्न करने की परम्परा अभी भी अरेराज में ही जीवित है. अरेराज महादेव मंदिर में अभी भी भारतीय संस्कृति को जिन्दा रखा गया है. लगभग विलुप्त हो चुकी पामरिया नृत्य की परम्परा को बरकरार रखने के लिए (Bihar Someshwar Nath temple) केसरिया प्रखंड के खजुरिया के पामेरिया लोक नर्तक यहां आते हैं और अपने नृत्य से भगवान को प्रसन्न करते हैं. साथ ही जिस महिला श्रद्धालु की मन्नत पूरा हो जाती है, उस महिला श्रद्धालु के आंचल पर पामरिया नृत्य कर भगवान शिव को खुश करते हैं. पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव गीत और संगीत के आदि देव है, इसीलिए पौराणिक पमारिया नृत्य के माध्यम से भगवान शिव को प्रसन्न करने की परम्परा सिर्फ यही पर देखने को मिलती है.

श्राप से मुक्ति के लिए चन्द्रमा ने स्थापित किया था इस मंदिर को

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इस मंदिर का लिखित इतिहास करीब एक हजार वर्ष पुराना है. जिसके मुताबिक जब वर्ष 1000 ई. में इस क्षेत्र में आर्य आए, तब इसे अरण्यराज के नाम से जाना जाता था. उस समय यहां से नेपाल के तराई क्षेत्रों तक जंगल ही जंगल था. इस मंदिर के संबंध में आधुनिक इतिहास उपलब्ध नहीं है, इसलिए साक्ष्य के लिए इतिहासकारों को भी पुराणों पर ही निर्भर रहना पड़ता है. चन्द्रमा द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक मंदिर की चर्चा स्कन्द पुराण में मिलती है, जिसमें चन्द्रमा द्वारा स्थापित इस पंचमुखी महादेव मंदिर का जिक्र है. पंचमुखी महादेव मंदिर पूरे भारत में केवल अरेराज में ही है.

कहानी कुछ यू हैं कि जब अहिल्या प्रकरण में चन्द्रमा शापित हुए थे.तब अगस्त मुनि ने शाप से मुक्ति (Bihar Someshwar Nath temple) के लिए चंद्रमा को गण्डक नदी के तट पर स्थित अरण्यराज में शिवलिंग की स्थापना करने की सलाह दी थी.जिसके स्थापना और पूजा के बाद चंद्रमा शाप से मुक्त हुए थे. दरअसल,चंद्रमा का पर्यावाची शब्द सोम होता है. इसीलिए इन्हें सोमेश्वर नाथ महादेव कहा जाता है.

shiva story

 

उत्तर बिहार के तथा पूर्वांचल के श्रद्धालु विशेषकर शादी, जनेउ, मुंडन के अवसर पर भी बाबा सोमेश्वर नाथ का दर्शन करने यहाँ आते हैं. इस मंदिर के दक्षिण दिशा में बटुक भैरव, पश्चिम में जलपा भवानी, व उत्तर में मसान माई का स्थान है. यहां सच्चे मन से मांगने वाले लोगों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है, इसलिए इस मंदिर को मनोकामना नाथ (Bihar Someshwar Nath temple) भी कहा जाता है. सावन माह में तथा अन्य पर्वो के अवसर पर लाखो श्रद्धालु भक्तजन देश तथा समीपवर्ती नेपाल से यहां लोग आते हैं. श्रावण में यहां भव्य मेला भी लगता है.

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