चम्पारण के सीता कुंड का रहस्य ~ शक्ति के प्रभाव से यहाँ पानी हमेशा गर्म रहता है

पूर्वी चंपारण के चकिया प्रखंड के मधुबन पंचायत में पौराणिक सीताकुंड धाम है. यहां प्रतिवर्ष रामनवमी के अवसर पर चैत्र सप्तमी से शुरू होकर चैत्र दशमी तकऐतिहासिक मेला लगता है लेकिन कोरोना की वजह से सैकड़ों वर्ष के इतिहास में पहली बार यह मेला नहीं लगा है. आइये जानते हैं चम्पारण के इस ऐतिहासिक और रहस्यमयी कुंड का इतिहास

 

वापसी में क्यों रुकी थी यहाँ राम की बारात ?

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार आज जहाँ सीताकुंड धाम है, वहीं प्रभु श्रीराम व सीता की बारात जनकपुर से अयोध्या वापसी के क्रम में रुकी थी. लोक मान्यताओं व अभिलेखों के अनुसार यह स्थल उस समय राजा जनक के भाई कुशध्वज के राज्य में था. इसी स्थल पर माता सीता की चौठारी की रस्म पूरी हुई थी और शादी के वक्त हाथ में बंधा कंगन भी खोला गया था. यहां अवस्थित कुंड से जल भरकर माता सीता ने शिवलिंग की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी.

उस समय यहाँ पर एक कुंड खुदाया गया था जिसमें पृथ्वी के अंदर से सात अथाह गहराई वाले कुऑ मिला था जिसका पानी कभी कम नही होता है और वो आज भी है, इसे सीताकुंड के नाम से जाना जाता है क्योकि इस कुंड के जल से सर्वप्रथम देवी सीता ने पुजा किया था.

इस घटना के स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम इसके साक्षी बने थे. इस कुंड की खुदाई का दिन किसी को ज्ञात नहीं लेकिन, प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार त्रेता युग में राजा जनक के भाई कुशध्वज ने इस पवित्र कुंड का निर्माण कराया था. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के दस्तावेज व चंपारण गजेटियर- 1860 में भी सीताकुंड धाम का वर्णन है.

अब भी हैं त्रेता युग के पांच कुंड, स्वयं गंगा आई थी यहाँ

सीताकुंड की चर्चा रामायण तथा रामचरितमानस में भी मिलती है, इसके किनारे मंदिर भी बने हुए हैं. इस कुंड के 1 किमी के अंदर ही ऐसे पांच कुंड हैं, जो त्रेतायुग से अबतक अपने जल के अलग-अलग उपयोग के लिए प्रसिद्ध हैं. जिसमें एक सबसे प्रसिद्ध गंगेया कुंड है, जहाँ गंगा स्नान के दिन हजारो-हजार कि संख्या मे लोग स्नान करने आते हैं क्योकि लोग यह मानते है कि जब यहाँ राम जी की बारात रूकी थी तो गंगा मैया स्वयं यहाँ आयी थी ताकि देवी सीता और भगवान राम सहित सभी स्नान कर सकें.

इस गांगेया कुंड के पास मे ही लगभग 40 फीट ऊँची एक बेदी भी है, जिस पर देवी सीता और भगवान राम ने पुजा अर्चना की थी. सीताकुंड धाम पर रामनवमी के दिन एक विशाल मेला लगता है। हजारों की संख्‍या में इस दिन लोग भगवान राम और सीता की पूजा अर्चना करने यहां आते है।

जब वर्ष 2003 में यहां 13वें चंपारण महोत्सव का आयोजन हुआ था, तब तत्कालीन जिलाधिकारी एस. शिवकुमार ने आयोजन समिति की पहल पर इसका जीर्णोद्धार कराया था. कुंड की सफाई के साथ में सीढ़ी व चबूतरा आदि का भी निर्माण कराया गया था लेकिन, इसके बाद तालाब के संरक्षण के लिए कोई पहल नहीं हुई और इसका जल सूख गया. अब हालात बेहद नाजुक है और इस सीता कुण्ड को फिर से जिंदा करने की कोशिश कितनी कामयाब हो पाएगी कहना मुश्किल है.

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