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गोपालगंज

द्वापरयुग से स्थापित हैं गोपालगंज में भुवनेश्वर नाथ मंदिर की कहानी

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गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड मुख्यालय से 17 किमी पश्चिम स्थित गरेयाखाल में भगवान शंकर का भुवनेश्वर नाथ मंदिर स्थित है. भगवान भुवनेश्वर का दर्शन करने के लिए विशेषकर सावन के महीने में आसपास के जिलों सहित उत्तर प्रदेश से हजारों श्रद्धालु यहाँ आते हैं. प्रत्येक शिवरात्रि एवं सावन की सोमवारी पर जलाभिषेक के लिए पूरे दिन भर भक्तों की लंबी कतार लगती है. वहीं,फाल्गुनी शिवरात्रि को दो दिवसीय मेला भी लगता है. इस दौरान धतूर, बैर, बेलपत्र तथा दूध से भगवान शंकर का अभिषेक किया जाता है.

मंदिर के पुजारी के अनुसार के अनुसार यह शिवलिंग द्वापर युग का है. अंग्रेजों के शासन काल के पहले वर्तमान में स्थित मंदिर के जगह पर जंगल झाड़ियां उपजी हुई थी. उसके बाद किसानों ने यहाँ पर धान व गेंहू की फसल का भंडारण करना शुरु किया. कुछ सालों बाद जब यहाँ के दौरान एक किसान फावड़ा से खुदाई कर रहा था,

तभी उसके फावड़े के किसी कठोर वस्तू से टकराने की आवाज हुई. जब उसने वहां की मिटटी हटाई तो उसे, शिवलिंग दिखा. धीरे धीरे यह बाात पूरे गांव में फैल गई और लोगो ने यहाँ पूजा अर्चना शुुरु कर दी. फावड़े के चोट का निशान आज भी शिवलिंग पर दिखाई पड़ता है. बाद में ग्रामीणों ने इस जगह पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया.

   
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