विधायक सुभाष सिंह का निधन और अनंत सिंह की सदस्यता समाप्ती के बाद अब शुरू होगा बैटल ऑफ गोपालगंज

Bihar by election 2022: बिहार की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, ऐसी कयास लगाई जा रही है कि मोकामा (Mokama) सीट पर अंनत सिंह (Anant Singh)  के प्रभाव के चलते राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की जीत सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, गोपालगंज सीट पर अनुमान लगाना मुश्किल है, पिछली बार यहां भाजपा की जीत हुई थी, इस बार इन सीटों पर हो रहे उप चुनाव के लिए सियासी घमासान मचा हुआ है, जिसे बैटल ऑफ गोपलागंज (Battle of Gopalganj) का नाम दिया जा रहा है। विधायक सुभाष सिंह (MLA Subhash Singh Death) के देहांत के बाद खाली हुई सीट पर चुनाव हुआ तो महागठबंधन की तरफ से कोई एक नहीं ,बल्कि कई दावेदार होंगे।

वहीं मोकामा सीट पर बाहुबली नेता अनंत सिंह का प्रभाव माना जाता है, वह लगातार आरजेडी (RJD) के टिकट से जीतते आ रहे हैं। अब उनकी सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव होंगे, ऐसे में इस सीट पर आरजेडी (RJD) ही उम्मदीवार उतारेगा, ऐसा तय माना जा रहा है। हालांकि, असली चुनावी लड़ाई गोपालगंज में है।

गोपालगंज सीट पर विधायक सुभाष सिंह का दबदबा रहा है, वह बीजेपी के उम्मीदवार रहे हैं, और चार बार इस सीट से विजय प्राप्त कर चुके थे, उनके देहांत के बाद अब गोपालगंज में भी बाय-इलेक्शन होंगे। साल 2020 के चुनाव में महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने आसिफ गफूर (Asif Ghafoor) को मैदान में उतारा था, मगर वह सुभाष सिंह को टक्कर नहीं दे सके। इस सीट पर दूसरे नंबर पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साधु यादव रहे थे, जीत का अंतर 360 हजार वोट था, जबकि आसिफ गफूर को लगभग 36 हजार वोट ही प्राप्त हुए थे। बावजूद इसके यह सीट उस वक्त  मुख्य चुनाव में कांग्रेस के पास ही थी, ऐसे में कांग्रेस उपचुनाव में मजबूत होती दिख सकती है।

भले ही 2020 में तेजस्वी ने गठबंधन के नाते यह सीट कांग्रेस को दे दी थी, लेकिन प्रदर्शन और सीट के पुराने रिकॉर्ड्स के कारण राजद (RJD) का दावा भी यहां कमजोर नहीं है। साल 2005 में नवंबर में हुए चुनाव में सुभाष सिंह ने पहली बार जीत हासिल की थी, इससे पहले वह तीन चुनावों में सीट आरजेडी  (RJD)के पास रही थी।

इसलिए कहना गलता होगा कि गोपालगंज सीट पर आरजेडी का शिकंजा नहीं है।  इस सीट से 1995 में जनता दल के राम अवतार विधायक बने तो साल 2000 में राजद के अनुरुद्ध प्रसाद उर्फ साधू यादव ने बाजी मारी, उसके बाद साल 2005 से भाजपा के सुभाष सिंह लगातार जीत हासिल करते हुए आ रहे हैं।

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वहीं, गोपालगंज से जेडीयू (JDU) का शुरू से ही कोई लेना देना नहीं रहा है। इस पार्टी ने कभी यहां से चुनाव ही नहीं लड़ा। साल 2015 में जब पहली बार महागठबंधन में JDU शामिल हुआ था, तब भी गोपालगंज सीट RJD के खाते में आई थी। इस बार बैकुंठपुर के पूर्व विधायक मंजीत सिंह (Manjit Singh) गोपालगंज सीट से अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे हैं।

वैसे इसे लेकर (Bihar by election 2022) अभी तक मंजीत सिंह ने न तो कुछ कहा है और न ही महागठबंधन के किसी दूसरे नेता ने। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा स्पष्ट है कि मंजीत सिंह गोपालगंज सीट से चुनाव लड़ने की कोशिश में हैं। दरअसल, दो बार विधायक रहने के बाद बैकुंठपुर से महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में 2015 में मंजीत सिंह को BJP मिथिलेश तिवारी ने हराया। जबकि 2020 में निर्दलीय चुनाव लड़कर वे RJD के प्रेमशंकर से हार गए।

अब प्रेमशंकर बैकुंठपुर से विधायक हैं जो RJD के हैं। ऐसे में 2025 में भी इस सीट पर मंजीत सिंह की दावेदारी कमजोर पड़ने की आशंका है। इसलिए मंजीत सिंह की कोशिश है कि सीट ही बदल दी जाए।

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