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बिहार

बचपन में करते थे लालटेन में पढ़ाई, सरकारी स्कूल में पढ़ती है बेटी, ऐसे हैं IAS अधिकारी अवनीश शरण

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यूपीएससी के सफर में मुकाम पर पहुंचने वाले प्रतिभागियों की कहानियां हर किसी के लिए प्रेरणास्त्रोत का काम करती है। हर प्रतिभागी जिंदगी के संघर्षों और उतार-चढ़ाव को पार करता हुआ आईएएस अधिकारी की कुर्सी तक पहुंचता है।

आज हम बात करेंगे एक ऐसे ही आईएएस अधिकारी की जिन्होंने तमाम अभावों में यूपीएससी की तैयारी कर सफलता हासिल की। हम बात कर रहे हैं अवनीश शरण की जो 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

अवनीश अपने काम और सरल स्वभाव के चलते अक्सर चर्चा में रहते हैं और सोशल मीडिया पर जनता के बीच खासे लोकप्रिय हैं अवनीश मुख्य रुप से बिहार के समस्तीपुर जिले के केवटा गांव से आते हैं जिनके पिता और दादाजी दोनों टीचर थे।

लालटेन की रोशनी में करते थे पढ़ाई

अवनीश ने शुरूआती पढ़ाई गांव के ही स्कूल से पूरी की। अवनीश को कक्षा 10वीं में 44.5 फीसदी, 12वीं में 65 % और स्नातक में 60.7 % नंबर मिले थे, यहां नंबर बताने के पीछे हमारा तर्क यह है कि आजकल कुछ बच्चे कम नंबरों के चलते सुसाइड तक कर लेते हैं।

अवनीश एक इंटरव्यू में बताते हैं कि उनका जीवन कई संघर्षों से गुजरा जहां घर में लाइट नहीं होने कारण वह लालटेन की रोशनी में पढ़ाई किया करते थे।

सोशल मीडिया पर रहते हैं काफी सक्रिय

अवनीश कुमार सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है और वह कई समस्याओं का समाधान सोशल मीडिया पर ही कर देते हैं। वहीं उन्होंने जिले के लोगों के लिए फेसबुक पर अपना मोबाइल नंबर भी लोगों के साथ शेयर कर रखा है।

सरकारी अस्पताल में करवाई थी पत्नी की डिलीवरी

अवनीश हर किसी की नजरों में तब आए जब 2017 में उन्होंने बलरामपुर के कलेक्टर पद पर रहते हुए अपनी बेटी वेदिका का एडमिशन वहां के एक सरकारी स्कूल में करवाया। इसके बाद उन्होंने सरकारी अस्पाताल से लोगों को जोड़ने के लिए अपनी पत्नी की डिलीवरी जिला अस्तपाल में करवाकर हर किसी को फिर चौंकाया।

वहीं अवनीश कुमार ने अप्रैल 2018 में कबीरधाम में कलेक्टर रहते हुए आदिवासी समाज के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई काम किए। बता दें कि अवनीश शरण के कामों के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उपराष्ट्रपति वैंकेय्या नायडू भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।

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