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UP के अयोध्या के बाद अब बिहार की बारी! ऐसे बनेगा विराट रामायण मंदिर देखें!! पूरी डिटेल्स

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के राम मंदिर के बाद अब बिहार (Bihar) में विराट रामायण मंदिर (Virat Ramayan Temple) का निर्माण किया जाएगा। चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर के निर्माण पर पूरे भारतवर्ष में चर्चा की जा रही है। बताया जा रहा है कि, इसके निर्माण के बाद इसकी संरचना ऐसी होगी कि सबकी नजरें इसी पर टिकी रह जाएंगी।

विराट रामायण मंदिर, बिहार के पूर्वी चम्पारण (Purvi Champaran) के चकिया (Chakiya) – केसरिया नगर (Kesariya Nagar) के निकट जानकीपुर (Jankipur) में बन रहा एक निर्माणधीन मंदिर है. इसे पटना की महावीर स्थल न्यास समिति (महावीर मंदिर न्यास) द्वारा बनाया जा रहा है। इसे कम्बोडिया के अंकोरवाट की दुगनी ऊंचाई एवं आकार का बनाए जाने की योजना है। इस मंदिर-समूह में कुल 18 देवताओं के मंदिर होंगे जिनमें मुख्य आराध्य भगवान राम होंगे।

सूत्रों के मुताबिक इस मंदिर के निर्माण में उन्हीं विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी जो नई दिल्ली के संसद के नए भवन का निर्माण करा रहे हैं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के सर्वोच्च पद पर सेवानिर्वित हुए विनीत जायसवाल भी विराट रामायण मंदिर के सदस्य के तौर पर चुने गए हैं, और पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Powergrid Corporation Of India) के पूर्व सीएमडी आरपी सिंह भी विराट रामायण मंदिर निर्माण समिति के सदस्य हैं।

इस पूरे मंदिर-समूह में कुल 18 गर्भ गृह और उतने ही शिखर होंगे, जिनमें केन्द्रीय शिखर के नीचे भगवान राम, सीता एवं लव और कुश की प्रतिमाएं विराजमान की जाएंगी, साथ ही इस मंदिर में महर्षि वाल्मीकि की भी एक प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके मुख्य गर्भगृह के समक्ष 20,000 लोगों की आयतन वाला एक विशाल प्रार्थना मंडप भी होगा। यह मंदिर दुनिया का सबसे बडा राम मंदिर होगा। यह मंदिर 1080 फुट लंबा और 540 फुट चौडा होगा और इसकी ऊंचाई 270 फुट होगी।

virat ramayan mandir

प्राथमिक तौर पर इस मंदिर का नाम विराट अंकोरवाट मंदिर रखा गया था, लेकिन कम्बोडियाई सरकार ने इस मंदिर के नाम को अंकोरवाट की नकल होने पर भारत सरकार से आपनी आपत्ति व चिन्ता जताई. इसके बाद भारत सरकार ने इस मंदिर के नाम को बदल कर इसे विराट रामायण मंदिर का नाम दे दिया।

250 वर्षों तक टिकाऊ बनाया जाएगा मंदिर

विराट रामायण मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार किया जा रहा है कि, मंदिर 250 वर्षों से अधिक वर्षों तक टिका रहेगा। इसके लिए मंदिर के निर्माण में कुछ खास किस्म के सीमेंट और स्टील का प्रयोग होगा। बता दे कि, पहले मंदिर का निर्माण लोहा, सीमेंट और टफन ग्लास से किया जाना था।

कब बनकर तैयार होगा यह मंदिर ?

यह मंदिर 100 एकड़ के क्षेत्र पर फैला होगा। इस आकार के साथ, पूर्ण होने पर यह विश्व की सबसे बड़ा धार्मिक संरचना होगी। इस निर्माण कार्य की कुल लागत 500 करोड़ होगी। फिलहाल इस मंदिर के लिए 200 करो़ड रूपए खर्च कर 90 प्रतिशत भूखंड का अधिग्रहण किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य करीब सात से आठ साल में पूरा होगा। इस मंदिर को बनाने में करीब 300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने पहले विराट रामायण मंदिर का निर्माण वैशाली जिले में करने का फैसला किया था, लेकिन किसी विवाद के चलते इसका निर्माण अब पूर्वी चंपारण ज़िले में किया जा रहा है।

तीन चरणों में पूर्ण होने वाले मुख्य मंदिर के निर्माण पर 200 करोड़ खर्च होंगे, बाद में अन्य निर्माण पर करीब 500 करोड़ खर्च होंगे। पहले चरण में हनुमान जी, दूसरे चरण में शिवजी और तीसरे चरण में रामजी का मंदिर बनेगा. पटना से करीब 120 किलोमीटर दूर केसरिया में जहां यह मंदिर बन रहा है, उस जगह को जानकी नगर नाम दिया गया है।

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