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छत्तीसगढ़

किन्नर होने के चलते मां-बाप ने किया घर से बेदखल, आज है सैकड़ों अनाथ बच्चों की मां

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हमारे समाज में कई ऐसे लोग हैं जो जीने के साथ सम्मान की लड़ाई भी लड़ते रहते हैं। अपनी पहचान अलग होने के चलते उनको जीवन में कई पथरीले रास्तों से गुजरना होता है, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे भी होते हैं जो उसी समाज के सामने यह साबित कर देते हैं कि हमारी पहचान अलग है तो क्या लेकिन हम किसी से कम नहीं है।

हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पखांजूर की रहने वाली मनीषा की जो एक किन्नर हैं। मनीषा के किन्नर होने का पता उनके माता-पिता को चलने के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया। इसके बाद मनीषा का सहारा एक किन्नर बना।

अब अनाथ बच्चों को लेती हैं गोद

मनीषा बताती है कि उसके परिवार से निकाले जाने के दुख हमेशा उसका मन कचोटता है। मनीषा ने आगे कहा कि वह अपनों के नहीं होने का दर्द घर से निकालने जाने के बाद समझ गई और मैंने अनाथ बच्चों को गोद लेने का फैसला किया।

आपको बता दें कि मनीषा ने अब तक 9 बच्चों को गोद लिया है जिनमें अधिकांश बेटियां है और जिनकी देखभाल मनीषा अपनी एक टीम के साथ मिलकर करती है।

किन्नर के लिए अब खुले कई रास्ते

आपको बता दें कि 2011 में जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 487,803 किन्नर थे जिनको सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे लिंग के तौर पर मान्यता दी है। साल 2017 में पहली बार एक किन्नर जज और पुलिस अधिकारी बनी।  वहीं किन्नर कई निजी क्षेत्रों में भी कई ऊंचाइयों को छू रही है।

आज मनीषा जैसे उदाहरण हमारी किन्नरों के प्रति नजरिया बदलते हैं और एक समतुल्य समाज की ओर सोचने पर मजबूर करते हैं।

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