इस परिवार के चार सदस्य हैं नेत्रहीन, लेकिन तकनीक की मदद से कर लेते हैं सारे काम

A blind Family in Delhi: दिल्ली के एक परिवार में 4 सदस्य हैं, ये सदस्य नेत्रहीन हैं, मगर बावजूद इसके वे अपना सभी काम बड़ी ही आसानी से कर लेते हैं, और इस चीज में मदद करती है- तकनीक। नेत्रहीन होने के बाद भी पढ़ाई करना, घर को व्यवस्थित ढंग से रखना, नौकरी करना, नाच-गाना तथा घूमना-फिरना इत्यादि।

इस परिवार में एक पति , पत्नी, तीन लड़के और दो लड़कियां हैं। घर के सबसे बड़े सदस्य बसंत कुमार वर्मा (Basant Kumar Verma) पेशे से डॉक्टर हैं, और इनकी कहानी तब से शुरु होती है जब 12-13 साल की उम्र में वह बिहार (Bihar) से दिल्ली आए थे, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के एक ब्लाइंड स्कूल से प्राइमरी शिक्षा प्राप्त की तथा बाद में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से M.Phil. के बाद हिंदी में पीएचडी (Ph.d) की। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली के सरकारी स्कूल में पीजीटी (PGT) हिंदी शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।

जिसके बाद बसंत के गांव वालों का उनके प्रति रवैया बदल गया। बसंत के घरवालों ने उनकी शादी उनके गांव की ही सुधा से ही करवा दी थी। सुधा पढ़ी-लिखी नहीं थी, लेकिन जिंदगी को लेकर उनका रवैया बहुत स्पष्ट था। फिर इन दोनों की पहली बेटी अर्चना हुई , लेकिन उनके लिए खुशी की बात यह थी कि अर्चना देख सकती थी।

इसके बाद बसंत के तीन बेटे आदित्य, अभिनव, आलोक और एक बेटी शक्ति वर्मा हुई। आदित्य और शक्ति बचपन से ही नहीं देख सकते थे। वहीं अभिनव और आलोक जन्म के समय पर सामान्य थे . लेकिन 8वीं में अभिनव के साथ एक हादसा हुआ, जिसमें अभिनव के आंखों की रोशनी पूरी तरह से गायब हो गई थी।

अब अभिनव की शादी हो चुकी है और इनकी पत्नी रीत देख सकती हैं। वहीं आदित्य की भी शादि हो चुकी है और इनकी पत्नी सुरभी भी नेत्रहीन है। आदित्य केंद्रीय विघालय में टीचर है, साथ ही शक्ति के पति रघुवीर आम लोगों की तरह देख सकते हैं। अर्चना की साल 2010 में ही शादी हो गई थी और वह अपने ससुराल दरभंगा में रहती है। आलोक फिलहाल अभी पढ़ाई कर रहे हैं।

अब घर के सभी लोग जो नेत्रहीन हैं, वे सभी तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी दिनचर्या का काम करते हैं। यह सभी लोग समर्थ संस्थाल में जाकर तकनीक का इस्तेमाल करना सीखते थे , कि कैसे टॉकिंग वॉच , टॉकिंग थर्मामीटर से लेकर टॉकिंग कैलकुलेटर का इस्तेमाल किया जाता है।

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