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बचपन में पोलियो से लकवाग्रसस्त हो गया था पैर, अब पैरालंपिक में देश के लिए खेंलेंगे वरूण भाटी

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रियो पैरालंपिक में देश के लिए कांसा लाने वाले ग्रेटर नोएडा के वरुण भाटी का टोक्यो पैरालंपिक में जाने का रास्ता साफ हो गया है। वरुण दूसरी बार पैरालंपिक में देश के लिए खेलने जा रहे हैं। दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम 29 जून को हुए ट्रायल के बाद वरूण को पैरालंपिक का टिकट मिला।

अर्जुन अवॉर्ड और लक्ष्मण पुरस्कार हो चुके हैं सम्मानित

वरुण भाटी ने इस साल चीन ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। वहीं 10 सितम्बर 2016 को रियो पैरालंपिक में पुरुष वर्ग में ऊंची कूद में उन्होंने कांस्य पदक भी जीता था। वरूण ने पिछले पैरालंपिक में 1.86 मीटर की ऊंची कूद लगाई थी।

वहीं इससे पहले वरूण ने 2014 में इंचियोन पैरा एशियाई खेलों में 5वां स्थान हासिल किया था। वरुण भाटी को भारत सरकार की तरफ से अर्जुन पुरस्कार और उत्तर प्रदेश सरकार ने लक्ष्मण पुरस्कार से भी सम्मानित किया है।

रोजाना तीन घंटे बहाते हैं पसीना

वरुण भाटी टोक्यो ओलंपित की तैयारी पिछले कई महीनों से कर रहे हैं। वह दिल्ली और ग्रेटर नोएडा के स्टेडियमों में लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं। वरूण हर दिन करीब 3 घंटे फील्ड पर पसीना बहा रहे हैं।

छोटे से गांव से पैरालंपिक का सफर

26 साल के वरूण ग्रेटर नोएडा के एक छोटे से गांव जमालपुर के रहने वाले हैं। वरूण का बचपन तमाम मुश्किलों भरा रहा जहां वह पोलियो के शिकार हो गए थे जिसके बाद उनका एक पैर लकवाग्रस्त हो गया।

इस बार सोना पक्का : वरुण

वरूण पैरालंपिक से पहले काफी जोश में दिखाई दे रहे हैं, एक मीडिया संस्थान से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस बार पैरा ओलंपिक में मैं पिछले बार के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर करने की उम्मीद रखता हूं और मैं इस बार देश के लिए सोना लाने की पूरी कोशिश करूंगा।

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