दिल्ली की राजमा चावल वाली दीदी, मोपेड से फ़ूड स्टाल तक का सफर शक्तिशाली महिला की कहानी

आज हम आपको कहानी बताएंगे राजमा चावल वाली दीदी आशा गुप्ता की। आशा गुप्ता दिल्ली की रहने वाली है, और शास्त्री नगर इलाके में रोज मोपेड पर खाना बेचती है। आशा गुप्ता राजमा चावल बेचती हैं, उनके दो बच्चे और एक दिव्यांग पति भी है। आशा गुप्ता को परिवार की जिम्मेदारी लेते हुए राजमा चावल बेचने काम करना पड़ा। आपको बताएं उनके ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। दरअसल उनके पति एक एक्सीडेंट में दोनों पैर गवा बैठे थे।

जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी आशा गुप्ता पर आ पड़ी। परिवार की जिम्मेदारी को समझ कर उन्होंने राजमा चावल बेचना शुरू कर दिया। दो बच्चों के होने के कारण बच्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं के ऊपर आ पड़ी थी।

लॉकडाउन ने काम धंधा किया चौपट

राजमा चावल वाली दीदी आशा गुप्ता आप पहले थोक के समान को लेकर अलग-अलग प्रकार के मटेरियल को साप्ताहिक बाजार में बेचा करती थी। वह अलग अलग जगहों पर जाकर के बाजार में अपनी दुकान लगाकर समान बेचती थी। लेकिन लॉकडाउन लगने की वजह से उनका यह काम चौपट हो गया। पहले 6 महीने तक आशा गुप्ता और उनके परिवार के पास बिल्कुल भी आमदनी नहीं थी। जिसके बाद आशा गुप्ता ने फूड स्टॉल लगाने का फैसला किया। उन्होंने इस कार्य को करने के लिए पति की मोपेड का इस्तेमाल करने का फैसला लिया।

मोपेड पर खाना, शुरू में नही चली दुकान

आशा गुप्ता की कहानी और संघर्ष यहीं खत्म नहीं हो गया था। अपने पति के मोपेड पर खाना बेचने का फैसला करने के बाद आशा गुप्ता ने 2 सितंबर को फूड स्टॉल की शुरुआत की थी। केवल ढाई हजार रुपयो को जोड़ करके उन्होंने भरत नगर इलाके में बेचना शुरू कर दिया। लेकिन पूरे दिन खाना बेचने के बाद भी आशा गुप्ता के पास कस्टमर नहीं पहुंच पाते थे। इसके बाद उन्होंने शास्त्री नगर इलाके में खाना बेचना शुरू किया, जहां उन्हें थोड़े बहुत कस्टमर आना शुरू हो गए थे।

यूट्यूबर ने की मदद

आशा गुप्ता की जिंदगी एक कोई यूट्यूबर ने बदली थी। यूट्यूबर गोल्डी सिंह ने अपने दोस्त के साथ मिलकर आशा की मदद करने का फैसला लिया। उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर 30000 रुपये लगाकर मोपेड को फूड स्टॉल में तब्दील कर दिया था। गोल्डी सिंह ने ही आशा गुप्ता का नाम राजमा चावल वाली दीदी रखा था।

आज कई प्रकार का खाना बेचती है आशा

आशा गुप्ता इस समय कई प्रकार का खाना बेचती हैं। वे राजमा चावल के अलावा कढ़ी चावल, मटर पनीर और चावल के साथ रोटियां व सुखी सब्जी और रायता भी बेचती है। सुबह 11:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक वह खाना बेचने का काम करती है।

उनका मानना है कि उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी लेते हुए एक शुरुआत की है। लेकिन उन्हें यकीन है कि परिवार और उनकी मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी। आशा गुप्ता मानती हैं कि वह 1 दिन अपने कार्य में जरूर सफल होंगी।

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