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सरिता कश्यप : बेटी को पालने के लिए स्कूटी पर बेचती है राजमा-चावल, भूखे बच्चों को मुफ्त खिलाती है खाना

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निर्मल कोमल अविरल शीतल

ममता की मूरत होती है

मां तो आखिर मां होती है

हम सभी जानते हैं कि इस दुनिया में मां के परिश्रम और स्नेह का स्थान कोई दूसरा नहीं ले सकता है। ऐसी ही एक महिला की कहानी हम आपको आज बताएंगे जिनके ढ़ाबे की चर्चा राजधानी में पिछले काफी दिनों से है।

हम बात कर रहे हैं पश्चिम विहार की रहने वाली 42 वर्षीय सिंगल मदर सरिता कश्यप की जिन्होंने अपनी बेटी को अच्छी परवरिश देने के लिए दिल्ली के पीरागढ़ी मेट्रो स्टेशन के पास स्कूटी पर एक चलता-फिरता ढ़ाबा खोला है जहां वह हर रोज राजमा-चावल खाने वालों की लाइन लगी रहती है। आइए जानते हैं सरिता के संघर्ष की कहानी।

नौकरी छोड़कर खोला ढ़ाबा  

सरिता बताती है कि वह पिछले कई सालों से एक ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी करती थी और इन सालों में कई जगहों पर नौकरियां बदली लेकिन हमेशा से ही कुछ अपना करने की मन में रहती थी।

वह कहती है कि शादी टूटने के बाद फिर बेटी को पालने की मजबूरी और हालात को देखकर एक दिन हिम्मत करके नौकरी छोड़ने का फैसला लिया और फिर कई तरह के बिजनेस आइडिया के बारे में सोचा और काफी सोचने के बाद एक ढ़ाबा खोलने का मैंने तय किया।

लेकिन चलता-फिरता ढ़ाबा ही क्यों

सरिता के चलता-फिरता ढ़ाबा की चर्चा हर कोई कर रहा है और सभी यह जानना चाहते हैं कि आखिर सरिता ने स्कूटी पर चलता-फिरता ढ़ाबा खोलने का विचार कहां से आया।

इस पर सरिता कहती है कि मैं एक जगह टिक कर बैठने वालों में नहीं हूं, अब जब मैं स्कूटी पर सामान लाती हूं तो आराम से स्टॉल को कहीं भी ले जा सकती हूं, इससे मुझे सहूलियत रहती है।

स्कूल में बेटी के साथ भेजे राजमा-चावल सबको आते थे पसंद

ढ़ाबे पर राजमा-चावल बेचने को लेकर सरिता बताती है कि मैं जब नौकरी के दिनों में मेरी बेटी को स्कूल टिफिन में राजमा-चावल बनाकर भेजती थी तो वह हर किसी को पसंद आता था, वही सोचकर मेरे मन में राजमा-चावल से शुरूआत करने का विचार आया।

वहीं झलको दिल्ली की टीम से बात करते हुए सरिता आगे बताती है कि मैं आगे इसे एक रेस्टोरेंट चेन के रूप में बढ़ाना चाहती हूं, जहां दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में स्टॉल लगाउंगी।

अपनी टीम को लेकर वह कहती है कि मैं आने वाले दिनों में मैं अपनी टीम बढ़ाउंगी जिसमें सिर्फ महिलाओं को ही शामिल करुंगी, मैं चाहती हूं कि उन महिलाओं को आगे लाया जाए जो कुछ करने की चाह रखती है। इसके अलावा सरिता हर रोज स्टेशन और पेट्रोल पंप के पास घूमने वाले गरीब बच्चों को मुफ्त में खाना भी खिलाती है।

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