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खेती

क्यों आसमान छू रही है ग्वार की कीमतें, अभी बेचना सही सौदा है या नहीं? जानिए सबकुछ यहां

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राजस्थान के कई हिस्सों में इस समय कम बारिश की चिंता के साथ ग्वार और गम की कीमतों में उछाल की चर्चा भी तेज है। ग्वार और गम की कीमतें एक बार फिर अपना 10 साल पुराना इतिहास दोहराने की ओर बढ़ रही है।

अकाल की सुगबुगाहट के बीच दोनों के दाम रोज चढ़ रहे हैं। बीते एक महीने में ग्वार के भाव 5 हजार तो गम के भाव में 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आई है। राजस्थान से लेकर हरियाणा की मंडियों में इस हफ्ते ग्वार 9 हजार रुपए और गम 13 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक चला गया।

ग्वार की कीमतों में इस तरह तेजी आने से कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, कुछ किसान अपना ग्वार अभी बेचने की सोच रहे हैं तो काफी में ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ मच गई है। आपको बता दें कि भाव के आसमान छूने की मुख्य कारण मानसून है।

पश्चिमी राजस्थान के इलाके बीकानेर, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, चूरू में ग्वार अच्छी खासी पैदावार होती है लेकिन इस बार उम्मीदों के मुताबिक बारिश नहीं होने से अब अकाल जैसे हालात बन रहे है। वायदा बाजार का कहना है कि इस बार देशभर में ग्वार की स्थिति कमजोर रहेगी।

एक अनुमान के मुताबिक इस साल ग्वार की कुल पैदावार 30 लाख बोरी होगी जो कि बीते बरस 60 लाख बोरी थी। आइए समझते हैं कि ग्वार में दामों में इस तरह तेजी क्यों हो रही है।

बिना तेज डिमांड के कीमतों में बढ़ोतरी !

आमतौर पर इकोनॉमिक्स का एक नियम है कि जब कहीं से नई डिमांड खड़ी होती है तो कीमतों में उछाल आता है। ऐसे में ताजा हालातों को देखें तो एक तरफ भारत से चीन, अमेरिका, रूस और जापान आदि देशों में होने वाला ग्वार का निर्यात अभी बंद है, तो दाम चढ़ने का मुख्य कारण कम बारिश होना है।

बीकानेर जिले की ही बात करें तो करीब साढ़े पांच लाख हैक्टेयर में ग्वार की फसल बोई जाती है जहां इस बार तीन लाख 40 हजार हैक्टेयर पर ही बिजाई हुई है।

10 साल पहले पहुंचा था ग्वार 32 हजार

साल 2011-12 आज से 10 साल पहले में ग्वार के भाव 32 हजार रुपए और गम एक लाख दो हजार 500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे क्योंकि उस दौरान विदेशों में डिमांड में तेजी आई थी। बीते 10 सालों में कभी ग्वार के भाव 5 हजार से ऊपर नहीं गए ऐसे में अब 10 साल बाद व्यापारी और जमींदार किसान फूल नहीं समा रहे हैं।

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