80 रूपए का लोन लेकर खड़ा किया 800 करोड़ का बिजनेस, ऐसे बना लोगों के स्वाद का राजा लिज्जत पापड़

90 के दशक में टीवी पर धारावाहिकों के बीच में आने वाले विज्ञापान इतने फेमस हुआ करते थे कि सालों बाद भी लोगों के जहन में वो ताजा हैं। किसी भी ब्रांड को बनाने में उस दौरान विज्ञापनों का अहम रोल होता था।

आपको याद हो तो उस दौरान एक विज्ञापन आया करता था “कर्रम कुर्रम-कुर्रम कर्रम” के जिंगल वाला लिज्जत पापड़, आ गया नाम सुनते ही मुंह में पानी, आएगा भी क्यों नहीं लिज्जत पापड़ का स्वाद ही कुछ ऐसा था।

जब देश उदारीकरण के मुहाने पर खड़ा था तब इस लिज्जत पापड़ लोगों की जीभ पर ऐसा चढ़ा कि देखते ही देखते एक ब्रांड बन गया और आज यह बिजनेस करीब 800 करोड़ रूपए का है। आज हम आपको बताते हैं कि कैसे लिज्जत पापड़ ने एक ब्रांड बनने का सफर तय किया।

7 महिलाओं ने शुरू किया बिजनेस

आपको बता दें कि गुजराती में लिज्जत का मतलब ‘स्वाद’ होता है। लिज्जत पापड़ की शुरूआत 1956 में 7 गुजराती महिलाओं ने की थी। इन महिलाओं को उस दौरान सिर्फ पापड़ बनाना आता है इसलिए इन्होंने पापड़ बनाने का बिजनेस चुना लेकिन उस दौरान इन महिलाओं के पास पैसे की कमी थी।

जसवंतीबेन जमनादास पोपट को मिला पदम श्री

1956 में जसवंतीबेन जमनादास पोपट के दिमाग में यह विचार आया और उन्होंने अपने पड़ोस की 7 अन्य महिलाओं को सात जोड़ा और पापड़ बनाना शुरू कर दिया।

पापड़ बनाने का काम मुंबई के गिरगांव इलाके में शुरू किया गया। पोपट के साथ सात अन्य महिलाएं पार्वतीबेन रामदास थोडानी, उजाम्बेन नारंदास कुंडलिया, बानुबेन तन्ना, लगुबेन अमृतलाल गोकानी और जयबेन विठलानी थी। बिजनेस में धीरे-धीरे सात से सैकड़ों लोग हो गए।

80 रुपये का लिया लोन

पैसे की कमी के चलते इन महिलाओं ने एक सामाजिक कार्यकर्ता छगनलाल कमरसी पारेख से 80 रुपये का लोन लिया और ये पैसे अपने बिजनेस में लगाए। 80 रूपए से महिलाओं ने पापड़ बनाने का सामान खरीदा और पाप़ड़ बनाने लगी।

देखते ही देखते 15 मार्च 1959 को मुंबई में एक मशहूर मार्केट मर्चेंट भूलेश्वर में उनके पापड़ बिकने लगे। लिज्जत ने एक सहकारी योजना के तौर पर अपने बिजनेस को आगे बढ़ाना शुरू किया और कुछ ही दिनों में कंपनी में 25 लोग काम करने लगे।

ऐसा कहा जाता है कि लिज्जत पापड़ बनाने वाली इस कंपनी ने पापड़ की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया।

पहले साल की कमाई रही 6196 रुपए

कंपनी का बिजनेस धीरे-धीरे चल निकला और पापड़ को लोग जानने लगे। कंपनी बनने के बाद पहले साल में इनकी कमाई 6196 रुपए रही। लिज्जत पापड़ अब ब्रांड की तरफ बढ़ रहा था और कंपनी में अब 300 से अधिक लोग काम करने लगे।

1962 में कंपनी ने पापड़ का नाम लिज्जत और अपने संगठन का नाम श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ रखा जिसकरे तहत इन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार दिया।

आज की तारीख में बाजार में लिज्जत पापड़ के कई तरह के अन्य उत्पाद भी आते हैं जिनकी लोगों में भारी डिमांड रहती है और कंपनी में करीब 40000 से अधिक लोग काम करते हैं। लिज्जत पापड़ को विदेशों में भी भेजा जाता है।

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