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हरियाणा

डिविज़नल कमिशनर की बेटी ने दुसरी बार पास की यूपीएससी परीक्षा IAS Devyani की कहानी

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IAS Devyani

सच्ची श्रद्धा और लगन के साथ कड़ी मेहनत की जाए तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। इसी बात को सच साबित किया हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली देवयानी (IAS Devyani) ने। देवयानी ने हाल ही में यूपीएससी 2020 की जारी की गई नतीजों में सफलता हासिल कर ऑल इंडिया में 11वीं रैंक (11th Rank) हासिल की है। डिविजनल कमिश्नर विनय सिंह की बेटी देवयानी ने अपने पिता की तरह सरकारी क्षेत्र में,सिविल क्षेत्र में जाकर जनता की सेवा करना चाहती थी। उन्हें खुशी है कि उन्होंने अपने बचपन के सपने को साकार कर लिया है।

पढ़ाई में है होशियार

हरियाणा की बेटी देवयानी की बात करें तो उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा एस.एच सीनियर सेकेंडरी (S.H Secondary)  स्कूल चंडीगढ़ (Chandigarh) से पूरी की थी। उसके बाद 2014 में उन्होंने बिट्स पिलानी (Bits Pilani) गोवा केंपस से इलेक्ट्रिकल कम्युनिकेशन (Electrical Communication Engineering )  इंजीनियर की डिग्री के लिए दाखिला लिया। देवयानी ने अपनी इंजीनियरिंग के दौरान ही यूपीएससी करने का फैसला कर लिया था। वह अपने पहले 3 प्रयासों में असफल हो गई। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने कड़ी मेहनत के साथ आज ऑल इंडिया में 11वीं (AIR 11)  इतिहास रच दिया है।

ias devyani

3 बार असफल,2 बार सफल

देवयानी की बात करें तो उन्होंने साल 2015, 2016 ,2017 में यूपीएससी की परीक्षा दी और तीनों बार असफल हो गई। 2017 में वह इंटरव्यू में जाकर असफल हुई। इसके बाद उन्होंने 1 साल का गैप लेकर 2019 में एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया। इस बार देवयानी की मेहनत रंग ले आई थी, उन्होंने ऑल इंडिया में 222 की रैंक हासिल की थी। इसके बाद वह शिमला में जाकर ट्रेनिंग करना भी शुरू कर दिया था। देवयानी अपने ट्रेनिंग के दौरान भी दृढ़ संकल्प के साथ कड़ी मेहनत करती रही। इसके बाद उन्होंने रैंक सुधारने के लिए एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और इस बार 11वी रैंक हासिल की है।

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पिता ने किया प्रेरित

देवयानी कहती है कि ऑप्शनल विषय में स्कोर करने का उनका टारगेट था। इसके लिए उन्होंने मॉक टेस्ट (Mock Test) दिए, इंटरव्यू (Interview) दिए और इसका लाभ उन्हें परीक्षा के दौरान हुआ। वह रोजमर्रा की अपडेट के लिए अखबार (Newspaper) पढ़ती थी। वही देवयानी कहती है कि उन्होंने हमेशा गंभीरता से पढ़ाई की है कभी नहीं देखा कि वह कितने घंटे पढ़ रही हैं। शिमला में ट्रेनिंग के साथ पढ़ाई करना उनके लिए मुश्किल था और वह वीकेंड में पूरे दिन पढा करती थी। देवयानी कहती है कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा से प्रेरित किया। वह अब अब आगे चलकर समाज कल्याण काम करना चाहती हैं।

सेल्फ स्टडी ने की मदद

देवयानी कहते हैं कि यह उनका का पांचवा प्रयास था। पिछले साल उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा को पास कर लिया था। इस साल उनके ऊपर ज्यादा प्रेशर नहीं था। लेकिन फिर भी रैंक सुधारने के लिए उन्होंने एक और प्रयास देने का फैसला किया। वह कहती हैं कि इस दौरान उन्हें ऑनलाइन एजुकेशन ने बेहद मदद की थी। सेल्फ स्टडी के साथ उन्होंने अपनी रैंक में सुधार कर लिया इस बात की उन्हें खुशी है। वह कहती है कि सेल्फ मोटिवेशन और मां-बाप के सहयोग से उन्होंने अपने गोल अचीव किया है।

   
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