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भारत

मिल्खा सिंह को देख स्टेडियम में 10000 महिलाओं ने बुर्का उठाकर बोला-इस सरदार ने कर दिया कमाल

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मिल्खा सिंह के करियर की बात करें तो उन्होंने एशियाई खेलों में चार बार भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता है। साल 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 1960 में रोम ओलंपिक में 400 मीटर की दौड़ में चौथे स्थान पर रहे थे। साल 1956 और 1964 के ओलंपिक में उन्होंने भारत का नेतृत्व किया था। इसके अलावा मिल्खा सिंह भारत के लिए कई मेडल जीत चुके हैं। साल 1959 में उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

बाप बेटे की की है पहली पद्मश्री वाली जोड़ी

उनके जीवन से जुड़ी एक बात बताएं तो मिल्खा सिंह के पुत्र जीव मिल्खा सिंह को पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। मिल्खा सिंह के बेटे भारत के लिए गोल्फ खेलते हैं। उनके बेटे जीव ने एशियाई टूर आर्डर ऑफ मेरिट में दो बार भारत को विजय दिलाई है। साल 2006 और 2008 में भारत के लिए दो बार जीत चुके हैं। ऐसा करने वाले वे भारत के एकमात्र गोलफर है। जीव को उनकी उपलब्धि के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। मिल्खा सिंह और उनके बेटे की जोड़ी भारत की एकमात्र जोड़ी है जिन्हें खेलों में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। बाप बेटे की है जोड़ी भारत की एकमात्र जोड़ी जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

पाकिस्तान में रह गए सब दंग 

साल 1960 में ओलंपिक के दौरान मिल्खा सिंह 0.1 सेकंड से पदक जीतने में चूक गए थे। मिल्खा सिंह बिल्कुल करीब होकर भी मेडल से चूक गए थे। जिसके बाद उन्हें पाकिस्तान से निमंत्रण आया था और उन्होंने उस निमंत्रण को ठुकरा दिया था।

मिल्खा सिंह कहते थे कि जब उन्हें पाकिस्तान से निमंत्रण आया था,तब उन्होंने उस बात को ठुकरा दिया था। क्योंकि उन्हें बटवारे का वह समय याद था जब उनके परिवार वालों को मारा और पीटा जा रहा था। मिल्खा सिंह बताते थे कि निमंत्रण ठुकराने के बाद उन्हें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बुलाया था। नेहरू जी ने मिल्खा सिंह से कहा था कि उन्हें पाकिस्तान जाना चाहिए। खेलों से दोनों देशों के बीच में प्यार बढ़ता है। पड़ोसियों के बीच में प्यार बढ़ता है।

मिल्खा सिंह बताते थे कि उस वक्त पाकिस्तान में सबसे तेज एथलीट अब्दुल खालिक हुआ करते थे। अब्दुल खालिक के साथ उनकी लाहौर स्टेडियम में दौड़ करवाई गई थी। मिल्खा सिंह ने बताया था कि लाहौर स्टेडियम में उस वक्त उनकी दौड़ देखने के लिए 60 हजार से ज्यादा लोग उपस्थित थे। वहीं पाकिस्तान के राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान भी वहां रेस देखने के लिए मौजूद थे। मिल्खा सिंह ने बताया था कि उस दौड़ में उन्होंने अब्दुल खालिक को हरा दिया था। जिसके बाद वहां मौजूद बुर्के वाली औरतों ने बुर्खा उठाकर मिल्खा सिंह की तारीफ करते हुए कहा था कि सरदार ने कमाल कर दिया।

वहीं उन्होंने बताया था कि मंच पर मेडल देते हुए पूर्व राष्ट्रपति पाकिस्तान के फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें फ्लाइंग सिख का नाम दिया था।

बन चुकी है फ़िल्म 

आपको बताएं तो मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित बॉलीवुड में एक फिल्में बन चुकी है। फिल्म का नाम भाग मिल्खा भाग था। फिल्म को राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने निर्देशित किया था। फिल्म में मुख्य भूमिका में जावेद अख्तर के बेटे मशहूर एक्टर फरहान अख्तर मिल्खा सिंह के किरदार में नजर आए थे। फिल्म को लोगों ने बहुत पसंद किया था।
हालांकि मिल्खा सिंह बताते हैं कि फिल्म में उनके जीवन को पूरी तरीके से नहीं दर्शाया गया। मिलकर सिंह ने असल जीवन में ज्यादा दुख देखे थे।

मोदी समेत कई बड़ी हस्तियों को हुआ दुख

फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह के निधन के बाद राजनीति व बॉलीवुड से लेकर तमाम बड़ी हस्तियों को उनकी जाने से दुख हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि भारत ने आज एक महान खिलाड़ी को खो दिया। मिल्खा सिंह अनेक भारतीयों के दिल में अपना एक विशेष स्थान रखते है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे लिखा कि लाखों लोगों को प्रेरणा देते थे। उनके जाने का बेहद दुख हुआ है।

प्रधानमंत्री ने दूसरा ट्वीट करते हुए लिखा कि कुछ दिन पहले मेरी बात मिल्खा सिंह से हुई थी। मुझे अंदाजा नहीं था कि मेरी यह आखरी बार मिल्खा सिंह से बात हो रही है। प्रधानमंत्री ने आगे लिखा है कि मिल्खा सिंह का जीवन आने वाले कई खिलाड़ियों को प्रेरणा देगा। उनके परिवार और उनके चाहने वालों के साथ संवेदनाएं। ओम शांति।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि करोड़ों युवाओं के प्रेरणा स्रोत पदम श्री मिल्खा सिंह के निधन से दुखी हूं। दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि। नितिन गडकरी ने लिखा कि मिल्खा सिंह की कहानी अनेक लोगों के लिए प्रेरणा देने वाली है। भगवान मिल्खा सिंह की आत्मा को शांति दें। साथ ही परिजनों को संबल प्रदान करें। ओम शांति।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा कि बेहतरीन एथलीट और खेल दिग्गज मिल्खा सिंह के निधन के समाचार से दुखी हूं। उन्होंने कहा कि मिल्खा सिंह ने उपलब्धियों में देश का नाम रोशन किया है। मिल्खा सिंह एक अद्भुत व्यक्ति थे। उन्होंने अंतिम सांस तक खेलों के लिए योगदान दिया। उनके जाने से बेहद दुख हुआ। परिवार को मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रसाद नड्डा ने लिखा मिल्खा सिंह के जाने के समाचार से दुखी हूं। उनका जीवन कई आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा। उन्होंने दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। परिवार वालों को इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं।

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान ने लिखा कि फ्लाइंग सिख हमारे बीच में नहीं रहे। लेकिन उनकी यादें हमेशा हमारे बीच में रहेंगी। वह खेल जगत के दिग्गज आदमी थे। उनके द्वारा पाई गई उपलब्धियां अतुल्य है। शाहरुख खान ने आगे लिखा कि मिल्खा सिंह मेरे साथ साथ कई लाखों लोगों के लिए प्रेरणा थे। उनके जाने का दुख है।

भारत के पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दिगल मिल्खा सिंह के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है उनके परिवार और चाहने वालों के लिए संवेदनाएं ओम शांति।

फिल्म में मिल्खा सिंह काका का किरदार निभा चुके फरहान अख्तर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि मेरा एक हिस्सा अभी भी यह मानने से इंकार कर रहा है कि आप नहीं रहे। हो सकता है कि यह वह जिद्दी पक्ष हो जो मुझे आपसे विरासत में मिला हो। वह पक्ष जब वह किसी चीज पर अपना मन लगाता है, बस कभी हार नहीं मानता और सच तो यह है कि आप हमेशा जीवित रहेंगे। क्योंकि आप एक बड़े दिल वाले, प्यार करने वाले, गर्मजोशी से भरे, जमीन से जुड़े इंसान थे। आपने एक विचार का प्रतिनिधित्व किया। आपने सपने का प्रतिनिधित्व किया। आपने (अपने शब्दों का उपयोग करने के लिए) प्रतिनिधित्व किया कि कितनी मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को उसे घुटनों से उठाकर आसमान को छूने के लिए प्रेरित कर सकता है। आपने हम सभी के जीवन को छुआ है। जो लोग आपको एक पिता और एक दोस्त के रूप में जानते हैं, उनके लिए यह एक आशीर्वाद था। उन लोगों के लिए जो प्रेरणा के निरंतर स्रोत के रूप में नहीं थे और सफलता में विनम्रता की याद दिलाते थे। मुझे तहे दिल से आप से प्यार है।

सेक्टर 8 में हैं पार्थिव शरीर 

91 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले मिलकर सिंह के पार्थिव शरीर को उनके आवास चंडीगढ़ के सेक्टर 8 में अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया है। वहां तमाम बड़ी हस्तियां मिल्खा सिंह के अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रही है। बताया जा रहा है कि करीब शाम 5:00 बजे सेक्टर 21 के श्मशान घाट में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए ले जाया जाएगा।

वही आपको बताएं तो पंजाब सरकार ने मिल्खा सिंह के जाने के बाद राजकीय शोक घोषित कर दिया है। पंजाब सरकार ने 1 दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। पंजाब सरकार ने घोषणा की है कि मिल्खा सिंह की अंतिम यात्रा को राजकीय सम्मान दिया जाएगा।

बड़ी-बड़ी हस्तियां पहुंची दर्शन करने

मिल्खा सिंह के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शनों के लिए कई बड़ी हस्तियां उनके आवास पर पहुंच रही है। पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत बादल भी मिल्खा सिंह की अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे हैं।

वहीं पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रभारी वी पी सिंह बदनोर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि देश में एक महान खिलाड़ी को खो दिया। उनके जाने का दुख है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को संवेदनाएं दे।

चंडीगढ़ के डीसी मनदीप सिंह भी अंतिम दर्शनों के लिए मिल्खा सिंह के घर पहुंचे। वही बताया जा रहा है कि करीब 1:30 बजे दिन में खेल मंत्री किरण रिजिजू भी चंडीगढ़ में मिल्खा सिंह के अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचेंगे। साथ ही खबर यह भी है कि दोपहर करीब 2.30 बजे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी मिल्खा सिंह के अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचेंगे।

भारत के फ्लाइंग सिख और सबसे तेज धावक रहे मिल्खा सिंह ने शुक्रवार रात को करीब 11:30 बजे अंतिम सांस ली। एक बड़ी खबर हम आपको बताएं तो मिल्खा सिंह ने हम सभी को अलविदा कह दिया है। मिल्खा सिंह कोरोनावायरस से संक्रमित थे और उनका चंडीगढ़ के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। जिसके बाद शुक्रवार रात को 11:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जीवन की कहानी बहुत ही दिलचस्प और प्रेरणादायक रही है, जिनके चर्चे पडोसी मुल्क में भी होते है आइये शुरू करते है उनके जीवन की शौर्य गाथा

मिल्खा सिंह को 20 मई को कोरोनावायरस से संक्रमित पाया गया था। आपको बताए तो उनके घर में काम करने वाले रसोइए को कोरोनावायरस हो गया था। जिसके बाद मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी निर्मल कौर को भी कोरोनावायरस के चपेट में आ गए थे। 24 मई को मिल्खा सिंह को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिसके बाद 30 मई को उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन घर पर आने के बाद 3 जून को अचानक उनका ऑक्सीजन स्तर गिरता चला गया था।

जिसके बाद उन्हें पीजीआईएमईआर नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि बताया जा रहा है कि बुधवार को मिल्खा सिंह की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी, जिसके बाद उन्हें आईसीयू से जनरल आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। लेकिन शुक्रवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी जिसके बाद करीब 11:30 बजे रात को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आपको बताए तो 1 महीने से मिल्खा सिंह कोरोनावायरस से संक्रमित थे। बीते 13 जून को उनकी पत्नी और पूर्व भारतीय वॉलीबॉल टीम की कप्तान रही निर्मल कौर का भी कोरोना से निधन हो गया था।

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