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झारखण्ड

हिंदुस्तान की फुटबॉलर बेटी संगीता सोरेन ईंट भट्टे पर काम करने को मजबूर, सरकार ने दिया आश्वासन

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भारत एक ऐसा देश है जहां प्रतिभा की कमी नहीं है। लेकिन कई बार मजबूरी में विवश होकर प्रतिभा वाले लोग भी पीछे रह जाते हैं। हम बात कर रहे हैं झारखण्ड के धनबाद के बांसमुडी रेगन्नी पंचायत की रहने वाली संगीता सोरोन की। अंतरराष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी संगीता सोरेन आज आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं। भारत का नेतृत्व करने वाली संगीता सोरेन आज ईंट के भट्टे का काम कर रही है।

पूरे मामले की बात करें तो संगीता सोरेन के पिता नेत्रहीन है और उनके भाई भी लॉकडाउन में काम छूट जाने के बाद दूसरे काम की तलाश में है। इसी के चलते संगीता पर अब पूरे परिवार का बोझ उठाने की जिम्मेदारी आ गई है। इसी में मजबूर होकर कला से संपन्न होने के बावजूद भी संगीता ईट भट्टे का काम कर रही है।

मीडिया में यह खबर आने के बाद अब केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू तक मामला गया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि, उन्हें संगीता के बारे में बताया गया। संगीता ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नेतृत्व किया है और वह इस समय आर्थिक तंगी से गुजर रही है। हमारे कार्यालय ने उनसे संपर्क किया है और आर्थिक मदद करने का आश्वासन दिया है। हम सभी खिलाड़ियों के सम्मानजनक जिंदगी बना सके बस यही हमारी प्राथमिकता है।

खेल मंत्री किरण रिजिजू के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सरकार की ओर से हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है। हेमंत सोरेन ने सरकारी मदद और नौकरी का भी आश्वासन दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि खिलाड़ी कल्याण कोष से संगीता को 1 लाख रुपयों की मदद दी जाएगी। वही खेल विभाग की तरफ से कहा गया है कि धनबाद में डे बोर्डिंग भी खोला जाएगा, जिसमें संगीता को कोच बनाया जाएगा।

खेत में खेल करके भारत का नेतृत्व करने वाली संगीता सोरेन के करियर की बात करें तो साल 2018-19 में उन्हें भारत अंडर 17 फुटबॉल टीम का हिस्सा बनाया गया था। वही भूटान और थाईलैंड में खेले गए टूर्नामेंट में भी उन्होंने अपने हुनर से लोगों को चौंका दिया था। इस टूर्नामेंट में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। संगीता को इसके बाद सीनियर टीम में सेलेक्ट होने की उम्मीद थी लेकिन लॉकडाउन लग गया। संगीता कहती है कि सरकार को कुछ ऐसे इंतजाम करने चाहिए, जिससे मजबूरी में आकर किसी भी अन्य खिलाड़ी की हालत ऐसी ना हो जैसी उनकी हो गई है। संगीता आर्थिक तंगी से गुजरने के बावजूद भी पास के मैदान में जाकर रोजाना खेल की प्रैक्टिस भी करती हैं।

वही अब उनके परिवार को उम्मीद है कि संगीता को सरकारी नौकरी मिलेगी और घर की हालत सुधरेगी और उनकी बेटी वापस से खेलते हुए नजर आएंगी।

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