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कर्नाटक

एक बेसहारा की मदद कर शैतान से संत बने टी राजा की कहानी, अब ऑटो राजा के नाम से मशहूर

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ऑटो राजा, यह नाम सुनकर आप सोच रहे होंगे कि क्या यह कोई फिल्म का नाम है या फिर बाजार में कोई अलग तरह की ऑटो सर्विस आई है, लेकिन जो आपको लग रहा है वैसा कुछ भी नहीं है, माजरा कुछ और ही है।

दरअसल हम बेंगलुरु में पिछले 24 सालों से लोगों की सेवा कर रहे ऑटो राजा यानि थॉमस राजा की जो सालों से हजारों भिखारियों और सड़क पर रहने वाले बेसहारा लोगों का सहारा बने हुए हैं।

ऑटो राजा कौन हैं?

जिस ऑटो राजा को आप आज देख रहे हैं वह हमेशा से ऐसा नहीं था। 54 वर्षीय थॉमस तमिलनाडु के चेन्‍नई में रहते हैं। एक जमाने में सड़क पर लड़ने वाले गुंडे और छोटे अपराधों के लिए फेमस टी राजा 16 साल की उम्र में जेल पहुंच गए थे।

चेन्‍नई की काल कोठरी में जाने के बाद उनके जीवन में बदलाव आने शुरू हो गए। जेल की चारदीवारों ने उनकी जिंदगी में काफी गहर असर छोड़ा। ऑटो राजा बताते हैं कि जेल में जाने के बाद उन्‍हें जीवन की अहमियत के बारे में पता चला, वहां जाकर जीवन की मुश्किलों को करीब से देखा जिसके बाद एक शाम को उन्होंने खुद से जिंदगी का रास्ता बदलने का वादा किया।

टी. राजा के जीवन में बड़ा परिवर्तन तब आया जब उन्हें पता चला कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने से ही मिलती है।

ऑटो चलाकर करते थे कभी गुजारा

ऑटो राजा अपने पुराने दिनों में एक ऑटो चालक हुआ करते थे लेकिन आज बेसहारा और अनाथ लोगों के लिए ‘होम ऑफ होम’ नाम से शेल्‍टर  होम चलाते हैं। बेंगलुरु शहर में तीन जगहों पर ऐसे शेल्‍टर होम्‍स बने हुए हैं।

पहली मदद करने के बाद टी राजा से हुए ऑटो राजा

टी राजा बताते हैं कि एक बार सर्दियों में एक बूढ़े बेसहारा व्‍यक्ति को वह अपने घर ले आए थे। उन्होंने बुजुर्ग को रात भर अपने घर में रखा और घावों को साफ किया और खाना खिलाया। अगले दिन उन्‍होंने भिखारी के चेहरे पर मुस्‍कुराहट देखकर उन्हें जिस खुशी का एहसास हुआ उसका कोई मोल नहीं था।

फिलहाल ऑटो राजा बेंगलुरु में खुद का कोविड केयर और आइसोलेशन सेंटर भी चलाते हैं तथा कोरोनाकाल में उन्होंने कई मरीजों की मदद की थी।

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