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कर्नाटक

हरेकाला हजब्बा : ठेले पर संतरे बेचकर लिखा सैकड़ों बच्चों का भविष्य, अपनी कमाई से बनवाया स्कूल

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भारतवर्ष के इतिहास में समय-समय पर कई ऐसे लोग हुए जिन्होंने समाज को बदलने की दिशा में अपना पूरा जीवन लगा दिया। इन लोगों ने खुद एक सामान्य जीवन बिताया लेकिन आने वाली पीढ़ियों का भविष्य को सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाए। आज हम बात कर रहे हैं कर्नाटक के दक्षिण कनाडा के एक छोटे से गांव न्यू पाणुपू के रहने वाले हरेकाला हजब्बा की जिन्होंने अपने प्रयासों से कितने ही बच्चों का भविष्य लिखा।

कर्नाटक के रहने वाले हरेकाला हजब्बा 70 साल के हैं जो खुद कभी स्कूल नहीं गए और पढ़ लिख नहीं पाए लेकिन इसके बावजूद भी वह आज एक स्कूल को चलाते हैं, साथ ही उस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य सुधारने के लिए अहम प्रयास कर रहे हैं।

ग्राहक के सवाल से जगा सपना

हरेकाला हजब्बा के इस काम के पीछे जो किस्सा है उसके मुताबिक एक बार किसी ग्राहक ने हरेकाला से इंग्लिश में संतरे का दाम पूछा था। पढ़ाई-लिखाई नहीं करने के कारण हरेकाला दाम नहीं बता पाए। इसके बाद उनके मन में एक विचार आया कि जिस तरीके से अंग्रेजी में कमजोर होने के कारण मैं आज दाम नहीं बता पाया अगर गांव के बच्चे भी कमजोर रह गए तो वह भी अपना भविष्य सुधार नहीं पाएंगे।

इसके बाद उन्होंने एक मस्जिद में छोटे से स्कूल की शुरुआत की और अपने जीवन की सारी जमा पूंजी लगाकर उन्होंने एक स्कूल की स्थापना की और मस्जिद में स्कूल शुरू किया। उनके स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ने लगी जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने गांव में दक्षिण कन्नडा जिला पंचायत द्वारा प्राइमरी स्कूल की स्थापना की।

आप जानकर खुश होंगे कि मात्र डेढ़ सौ रुपए की रोजाना कमाई करने वाले हरेकाला ने अपने स्वार्थ के बारे में ना सोच कर के बच्चों के भविष्य के बारे में सोचा। हरेकाला हजब्बा को इस बेहतरीन कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें 2020 में पद्मश्री से नवाजा गया।

खुद का मकान तक नहीं है

हरे काला के पास खुद का मकान भी नहीं है। वह एक कच्चे मकान में रहते हैं, लेकिन खुद के स्वार्थ को ना सोच कर कि उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल की स्थापना की है और अपने जीवन की सारी जमा पूंजी स्कूल की स्थापना में लगा दी। हालांकि बाद में सरकार ने भी उनकी इस काम में मदद की थी।

आईएफएस अधिकारी ने ट्वीट कर दी जानकारी

आईएफएस अधिकारी प्रवीण कासवान ने ट्वीट करके हरेकाला के बारे में बताया। उन्होंने तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि यह हरेकाला है जो संतरे बेचने का काम करते हैं। इन्होंने अपनी सारी कमाई बच्चों के स्कूल की स्थापना करने के लिए लगा दी। ट्वीट में आगे अधिकारी ने लिखा कि हरेकाला को अधिकारियों की तरफ से जब फोन आया तो वह में राशन की दुकान में थे। जब उन्होंने फोन उठाया तब उन्हें बताया गया कि उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।

वहीं हरेकाला के जीवन पर आगे इसमर्थ पज़ीर ने एक किताब भी लिखी। इसके अलावा मंगलूर विश्वविद्यालय के सिलेबस में हरेकाला के बारे में पढ़ाया भी जाता है। इसके अलावा कनाडा प्रभा अखबार ने उन्हें पर्सन ऑफ द ईयर के लिए भी चुना था।

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