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केरल

ट्रांसजेंडर होने के कारण घरवालों ने टॉर्चर कर किया बेघर, आज कॉमर्शियल पायलट बन हर किसी को चौंकाया

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देश में ट्रांसजेंडर से जुड़ी कई कहानियां आपने सुनी होंगी जिनका अपना-अपना संघर्ष है लेकिन आज हम जिसकी कहानी आपको बताने जा रहे हैं वह 22 साल के ट्रांसजेंडर एडम हैरी है जो एक कॉमर्शियल पायलट है।

केरल सरकार ने कुछ समय पहले 22 वर्षीय हैरी को कमर्शियल लाइसेंस की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद देने का फैसला किया है। ट्रांसजेंडर होने की वजह से हैरी को घर के लोगों ने बेदखल कर दिया है। आज हम आपको पूरी कहानी बताएंगे देश के पहले ट्रांसजेंडर पायलट एडम हैरी की।

ट्रांसजेंडर होने के नाते घर वालो ने घर से निकाला

एडम हैरी ने साउथ अफ्रीका के जोहांसबर्ग से साल 2017 में प्राइवेट पायलट लाइसेंस प्राप्त किया था। प्राइवेट पायलट का लाइसेंस पाने के बाद वह जब भारत लौटकर आए तो उन्होंने सोचा कि अपने माता-पिता को अपने बारे में बताया जाए।

लेकिन उनके बताने से पहले उनके घर वालों को पता लग गया कि एडम ट्रांसजेंडर हैं, जिसके चलते उनके माता-पिता ने उन्हें घर में कैद कर दिया था। लगातार 1 साल तक एडम हैरी को नजरबंद कर दिया गया और इस दौरान उन्हें फिजिकल और मेंटल टॉर्चर किया जाता था।

घर से भाग गए एडम

अपने घर से भाग जाने के बाद वह एनीकलम पहुंच गए, वहां उन्हें उनके जैसे अन्य ट्रांसजेंडर मिले। एडम कहते हैं कि इस दौरान भी उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा था। वहीं उनके पास कोई भी काम करने को नहीं था। इसी के चलते कई बार उन्हें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर रात गुजारनी पड़ती थी। कई बार भूखे पेट सोना पड़ता था।

एडम ने इसके बाद एक ज्यूस की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया था वहां से एक दिन उन्हें एविएशन एकेडमी संस्था के बारे में पता चला और उन्होंने वहां पर पार्ट टाइम जॉब करना शुरू कर दिया था, लेकिन वहां भी एडम की जिंदगी आसान नहीं रही और उन्हें वहां भी भेदभाव का सामना करना पड़ता था।

केरल सरकार ने उठाया खर्च

एडम ने इसके बाद जस्टिस डिपार्टमेंट से संपर्क किया और उन्होंने एडम की सहायता की थी। केरल सरकार ने एडम के हुनर को पहचाना और उन्हें पायलट बनाने का फैसला किया।

केरल सरकार ने घोषणा की थी कि एडम को कमर्शियल पायलट लाइसेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी। हम आपको बताएं तो इसमें लगभग 22 लाख से ज्यादा का खर्च आता है। वहीं केरल सरकार ने कहा था कि एडम की ट्रेनिंग का सारा खर्चा सरकार उठाएगी। इसी के चलते एडम देश के पहले ट्रांसजेंटर पायलट बन चुके हैं।

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