मशहूर बुजुर्ग निशा’नेबाज चंद्रो तोमर की कहानी, गाँव से दुनिया तक का सफर

निशा’नेबाज चंद्र तोमर का देहांत 30 अप्रैल 2021 को कोरोना की वजह से हो गया। 10 जनवरी 1932 में शामली उत्तर प्रदेश में जन्मी चंद्र तोमर दादी की जीवन की कहानी हमसब को प्रोत्साहित करती है। चन्द्रो तोमर की बात करें तो वह बागपत उत्तर प्रदेश में रहती थी। बागपत के जोहड़ी गांव की रहने वाली चन्द्रो तोमर पिछले दिनों कोरोना संक्रमित पाई गई। जिसके बाद सांस लेने में दिक्कत के चलते उन्होंने मेरठ के अस्पताल में द’म तोड़ दिया। चंद्र तोमर की कहानी की बात करें तो 65 साल की उम्र में अपने शू’टिंग करियर की शुरुआत करने वाली चंद्र तोमर ने भारत का परचम पूरे विश्व में लहरा दिया।

ऐसे हुई करियर की शुरुआत

चंद्रो तोमर दादी का कैरियर की 65 उम्र में शुरू हुआ। इसके पीछे की कहानी की बात करें तो साल 1999 में उनकी पोती शेफाली तोमर शूटिंग सीखने की इच्छा जाहिर की, इसके बाद उन्हें गांव के जोहड़ी रा’इफ’ ल क्लब में भर्ती करवा दिया गया। रा’इफ’ ल लड़कों का क्लब था, इसलिए शेफाली चन्द्रो दादी को अपने साथ ले जाया करती थी। एक दिन जब शेफाली बं’दू क में छ’र्रे नहीं डाल पाई तो उनकी दादी ने पि’स्तौ’ ल में छ’ र्रे डाले और साथ ही निशा’ना भी साथ दिया। शू’टिंग में इसे बुल्स आई कहते हैं यानी सांड की आंख। इसके बाद क्लब के कोच फारुख पठान ने यह सारी घटना देखी,उन्होंने चन्द्रो दादी को शू’टिंग सीखने के लिए कहा।

जब दादी ने घर में बात की तो एक समय में उनके परिवार वालों ने इसका विरोध किया। लेकिन उनके 5 बच्चों ने उनकी हिम्मत बनाई और उन्हें शू’टिंग सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। चंद्रो तोमर ने इसके बाद अपनी ट्रेनिंग शुरू कर दी, वही चंद्र से प्रेरित होकर उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर ने भी शूटिंग में हाथ जमाना शुरू कर दिया। जिसके बाद इतिहास गवाह हो गया घर का कामकाज करने वाली चन्द्रो दादी एक के बाद एक 30 से ज्यादा राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतकर इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम लिखवा गई। साथ ही एक विश्व रिकॉर्ड भी बनाया जो सबसे ज्यादा उम्र में शू’टिंग करने वाली महिला का है।

उनकी मेहनत की वजह से आटा चक्की के लिए मशहूर जोहड़ी गांव अब शू’ट र गांव के नाम से जाना जाने लगा। साथ ही चंद्रो तोमर की इस शू’टिंग वाली परंपरा को उनकी भतीजी सीमा तोमर ने बनाए रखा हुआ है। सीमा भी भारत की पहली महिला शू’टर बनी जिसने रा’इफ’ ल और पि’स्तौ’ ल वर्ल्ड कप 2010 में मेडल जीता है।

चंद्रो तोमर की कहानी हर एक उस महिला को प्रोत्साहित करती है जो जीवन में कुछ करना चाहती है। शू’टर दादी की कहानी बताती है कि जीवन में कुछ सीखने और करने के लिए जज्बा, मेहनत और लगन होनी चाहिए उम्र तो केवल एक संख्या होती है।चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर के जीवन की कहानी से प्रेरित होकर एक फ़िल्म भी बनी हैं। उनकी बायोपिक सांड की आंख नामक फिल्म बड़े पर्दे पर साल 2019 में रिलीज हुई थी। जिसमें तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर ने मुख्य भूमिका निभाई है।

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