कभी किताब खरीदने के भी पैसे नहीं थे अब बिना कोचिंग के बनी IAS अफसर

कुछ संघर्ष की कहानियां ऐसी होती है कि उनको पढ़ते समय आपके लिए कल्पना करना मुश्किल हो जाता है कि इसका किरदार किन हालातों से गुजरा होगा। आज आपके लिए एक ऐसी ही कहानी लेकर आएं हैं जो अथाह संघर्ष के कई पड़ावों से गुजरती हुई अंजाम तक पहुंचती है।

कहानी है एक ऐसी आईएएस अफसर की है जिन्होंने पढ़ने के लिए किताबों को खरीदने की जद्दोजहद से लेकर एक-एक पैसे का, संसाधनों को पाने का और स्कूल की फीस देने के लिए लड़ाई लड़ी।

हम बात कर रहे हैं केरल के पिरबोम जिले के पंपाकुड़ा गांव की रहने वाली एनिस कनमानी की जिनके पिता किसान थे और उनकी मां भी उनके पिता के साथ खेती का ही काम करती थी। एनिस साल 2011 में यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया 65 वी रैंक लेकर आईएएस अफसर बनी थी।

डॉक्टर बनने का था सपना

एनिस ने 10वीं तक की पढ़ाई अपने जिले के एक स्कूल से की थी जिसके बाद वह डॉक्टर बनने का सपना देखने लगी। इसके लिए उन्होंने 12वीं कक्षा के बाद एमबीबीएस की परीक्षा को पास करने के लिए खूब मेहनत की थी लेकिन खराब रैंक आने की वजह से उन्हें एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिल पाया। जिसके बाद उन्होंने त्रिवेंद्रम सरकारी मेडिकल कॉलेज से नर्सिंग में बीएससी की पढ़ाई पूरी की।

ट्रेन में यात्रियों ने बताया आईएएस बन सकती हैं एनिस

एनिस अपने जीवन के बारे में बताते हुए कहती है कि जब एक बार वह ट्रेन की यात्रा कर रही थी तब उन्हें पास में बैठी एक महिला यात्री ने बताया था कि यूपीएससी की परीक्षा देकर आईएएस अफसर बना जा सकता है और उस महिला ने एनिस को यूपीएससी की परीक्षा देने के लिए प्रेरणा दी थी। इसके बाद एनिस ने खुद को यूपीएससी के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था।

बिना कोचिंग के पास की यूपीएससी परीक्षा

गरीब परिवार से आने वाली एनिस की आर्थिक स्थिति शुरू से ही खराब थी और कोचिंग लेने के लिए पैसे नहीं थे जिसके बाद उन्होंने सेल्फ स्टडी करने का फैसला लिया।

अपने पहले प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली थी लेकिन एनिस अपनी रैंक से संतुष्ट नहीं थी जिसके बाद उन्होंने साल 2011 में  एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और 65वीं रैंक हासिल की।

पिता को दिया सफलता का श्रेय

एनिस जब आईएएस अफसर बनी तब उन्होंने अपने पिता को इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों के बाद भी उनके पिता ने कभी पढ़ाई के आगे उनकी गरीबी को आने नहीं दिया। उनके पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दी। वर्तमान में एनिस कोडागु जिले में डिप्टी कमिश्नर के तौर पर कार्यरत है।

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