सीकर के 110 साल के ईश्वर फौजी का मजेदार इंटरव्यू- इनकी बातें सुन पेट पकड़ लेंगे!

Ishwar Fauji Ishwar Suliyawas: ईश्वर फौजी सुलियावास दातारामगढ़ सीकर।
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माता-पिता से रूठता हूं,
वह मेरा रोज का काम है।
देश सेवा का जज्बा निराला,
फौज में मेरा बड़ा नाम है।

रूठने वाला फौजी दादा
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे फौजी दादा से रूबरू करवा रहा हूं। जिसकी कहानी सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे।

परिवार और परिचय।
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urliyawas
सीकर (Sikar) जिले के सुल्यावास (Suliyawas) गांव में रहने वाले फौजी दादा ने अपना नाम ईश्वर बताया। हमारी संवाददाता खुशबू से बात करते हुए  उन्होंने अपने बेबाक इंटरव्यू में कहा कि मेरी उम्र 110 वर्ष है, जो किसी को तो सच लगती है और किसी को झूठ लगती है लेकिन यह बात सत्य है। उन्होंने कहा कि बचपन में मेरी माता का देहांत हो गया था।मेरी दादी ने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया था। मेरा बचपन बहुत ही दुख भरा रहा है। Ishwar Fauji Ishwar Suliyawas
आप कौन सी फौज में थे। तब उन्होंने बताया कि मैं अंग्रेजों की फौज में था। अंग्रेजी फौज में आपके साथ कैसा व्यवहार किया जाता था। इसके जवाब में दादा जी कहते हैं की वहां पर बकरे का मांस, सूअर का मांस, भरपूर मात्रा में मिलता था।मैंने तीनसाल लगातार हलवा खाया है। मेरे अंदर भरपूर मात्रा में ताकत हो गई थी। उन्होंने बताया कि जब अंग्रेजों की जर्मनी के साथ में लड़ाई हुई थी उस समय हम पानी के जहाज में बैठकर दूर देश गए थे।

बहू से बातें
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दादा जी के पोते की बहू ने खुशबू से बात करते हुए विस्तार पूर्वक बताया कि दादाजी सुबह के समय में तो बहुत अच्छी तरह से बातें करते हैं, लेकिन उसके बाद गर्मी से इनका हाल बेहाल हो जाता है।और यह अच्छी तरह से बोल नहीं पाते हैं। गर्मी में दादाजी की हालत खराब हो जाती है लेकिन सर्दी में इनका समय बहुत अच्छी तरह व्यतीत होता है। अभी सर्दी में दो किलो घी में इन्होंने मेथी के लड्डू खाए थे। जो बड़ा आदमी भी एक बार नहीं खा सकता।

मेहनती प्रवृत्ति के।
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Ishwar Fauji Ishwar Suliyawas
उनकी बहू ने बताया कि दादा जी बहुत ही मेहनती प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। इन्होंने अपने हाथों से पत्थर निकालकर, चुना तैयार करके एकेलों ने कुआं बनाया है। दो साल पहले तक तीन बजे लगभग यह उठ जाते,और सबको काम लगाते रहे हैं। दो साल पहले तक खेती का काम भी करते रहे हैं। अब भी 5:00 बजे सब को उठा देते हैं और नहीं उठते हैं तो हल्ला मचा देते हैं। बहू ने बताया कि दादाजी सर्दी में तो बिल्कुल सही रहते हैं लेकिन इनको गर्मी सहन नहीं होती है।
बहू ने बताया कि सुबह आठ बजे इनको नहला देते हैं। उसके बाद में ठंडी छाछ राबड़ी का कलेवा करवा देते हैं।इनके पास में पानी की बाल्टी भरकर रख देते हैं, जिससे थोड़ी थोड़ी देर से अपने पूरे शरीर को पानी से नहलाते रहते हैं।यदि पानी पासमें नहीं होता है,तो हल्ला मचा देते हैं।उन्होंने बताया कि आज भी दादाजी तीन बार दिन में खाना खाते हैं। सुबह 8 बजे छाछ राबड़ी और रोटी मिलती है, तो ठीक है नहीं तो दादाजी नाराज हो जाते हैं। फिर नहीं खायेंगे।

खाना पीना।
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बहु कहती है कि दादाजी को गर्मी का खाना, तेल वगैरह का चटपटा खाना बिल्कुल भी नहीं सुहाता है। इनको छाछ, राबड़ी, दूध,दही, ठंडी रोटी आदि, इस प्रकार का कुछ भी खाना खाने से किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं होती है। सुबह 8:00 बजे से पहले छाछ दही के साथ में ठंडी रोटी का नाश्ता करना उनके लिए बहुत जरूरी है।
अपने जमाने में किए गए काम की तुलना आज के कामसे लगातार घरपर रोज करते रहते हैं। मैं ऐसे करता था,मैं ऐसे करता था। तुम कुछ नहीं कर सकते आदि आदि। बहु ने बताया कि दादाजी कुछ दिन पहले तक दो व्यक्तियों का काम करते थे। अब भी 110 वर्ष की उम्र में कहते हैं कि मुझे जाव में ले चलो मैं प्याज की लावणी करूंगा।

अन्य।
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बहु ने बताया कि दादाजी के दो बेटे हैं, तो आधी पेंशन एक को देते हैं, तथा आधी पेंशन हमको देते हैं। आप दादा जी को किस प्रकार रखती है, के जवाब में बहु कहती है कि मैं तो दादाजी से बोलती हूं। दादाजी किसी नुकसान होने पर हल्ला करते हैं। बाकी किसी को कुछ भी नहीं कहते हैं।

अपने विचार।
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खान-पान और दिनचर्या,
स्वास्थ्य का बड़ा राज है।
शुद्ध आहार समय पर करो,
यह बड़ी उम्र का राज है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोती सर।

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