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जमशेदजी टाटा हैं दुनिया के सबसे बड़े दानवीर, बीते 100 सालों में 102 अरब डॉलर का किया दान

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jamshed ji

दुनिया के पिछले 100 सालों में सबसे उदार दानवीरों के नाम हाल में हुरुन रिपोर्ट और एण्ड लीगव फाउंडेशन द्वारा जारी किए गए जिसमें भारतीय उद्योग जगत के पितामह और टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा को सबसे बड़ा दानवीर चुना गया।

नमक से लेकर सॉफ्टवेयर कंपनी चलाने वाला टाटा समूह की नींव रखने वाले जमशेदजी दान देने में दुनिया में सबसे आगे हैं। टाटा समूह ने सबसे ज्यादा 102 अरब डॉलर रूपया दान में दिया है।

आज हम आपको इसी महान शख्सियत के बारे में बताएंगे कि आखिर कैसे कोई जमशेदजी टाटा बनता है?

जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 को हुआ था जिनहोंने  टाटा ग्रुप, टाटा स्टील और ऐसा माना जाता है कि उन्होंने ही जमशेदपुर की खोज की थी। जमशेदजी ने अंतिम सांस 19 मई 1904 को ली।

100 साल में सबसे बड़े दानवीर

जमशेदजी टाटा को हाल ही में हुरून और एण्ड लीगव फाउंडेशन द्वारा आंकड़ों में एक सदी यानी 100 साल का सबसे बड़ा दानवीर बताया गया है। इस फाउंडेशन ने 50 लोगों की सूची तैयार की है जिन्होंने एक सदी में सबसे ज्यादा दान किया है। इस फाउंडेशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जमशेदजी टाटा ने एक सदी यानी 100 साल में 102 अरब डॉलर जो भारतीय रुपयों के हिसाब से देखें तो लगभग 7.57 लाख करोड़ रुपए दान किए थे।

बिल गेट्स से ज्यादा दान किया

फाउंडेशन द्वारा जारी की गई सूची में बिल गेट्स और उनकी पूर्व पत्नी मिलिंडा का भी नाम है। बिल गेट्स के द्वारा किए गए दान के आंकड़ों को देखें तो उन्होंने 74.6 अरब डॉलर दान किए हैं। वही सूची में निवेशक वारेन बफे का भी नाम है जिन्होंने 37.4 अरब डॉलर दान किए हैं। वहीं जॉर्ज सोरेस ने 34.8 अरब डॉलर और जॉन डी राकेरलर ने 26.8 अरब डॉलर दान किए।

जमशेदजी टाटा ने देखे थे अपने जीवन में चार सपने

जमशेदजी टाटा ने साल 1896 में मुंबई के गवर्नर को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने धन कमाने के बाद लोगों की मदद करने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि कृषि प्रधान देश में औद्योगिक आधार की जरूरत है।

वहीं जमशेदजी टाटा ने चार सपने देखे थे जहां उन्होंने विज्ञान कला और उद्योग के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस रिसर्च का सपना देखा था। वहीं अपने दूसरे सपने को सच करते हुए 1909 में उन्होंने इंडियन क्यूट ऑफ साइंस की स्थापना भी की थी।

भारत में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए विश्वविद्यालय बनाने की सिफारिश भी जमशेदजी टाटा ने की थी। वहीं उन्होंने तीसरा सपना स्टील इंफ्रास्ट्रक्चर और हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर बढ़ाने का देखा था। उनका सपना था कि औद्योगिक जगत को मजबूत बनाना चाहिए। वहीं उनका चौथा सपना था कि एशिया का सबसे बड़ा ताजमहल पैलेस होटल बनाया जाए जो उनकी मृत्यु से कुछ महीने पहले ही बना था।

पिता ने शुरू किया व्यापार खुद ने दिया साथ

जमशेदजी टाटा के पिता ने व्यापार की शुरुआत की थी। उनके पिता ने मुंबई में जाकर व्यापार करना शुरू किया था जिसके बाद जमशेदजी टाटा ने भी इंग्लैंड से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिता के साथ व्यापार में काम करने का फैसला किया था।

21 हजार से की टाटा ग्रुप की शुरुआत

आपको बता दें कि टाटा ग्रुप की शुरुआत करने वाले जमशेदजी टाटा ही थे जिन्होंने साल 1868 में टाटा ग्रुप की शुरुआत केवल 21हजार रुपये से की थी। टाटा ने अपने नाम से हांगकांग में फर्म की शुरूआत की थी। साल 1874 में उन्होंने डेढ़ लाख रुपए के साथ सेंट्रल इंडिया स्पिनिंग कंपनी की शुरुआत की थी।

जीवनभऱ कमाई करते रहे दान

जमशेदजी टाटा ने कई क्षेत्रों में दान किया था जिसमें स्कूली शिक्षा,व्यवसायिक शिक्षा,हॉस्पिटल, 1883 में इटली में आए भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद, लंदन में नए अस्पताल बनाने के लिए उन्होंने मदद की। 1892 में उन्होंने भारतीय विद्यार्थियों को इंग्लैंड में पढ़ाई करने के लिए भी स्कॉलरशिप की शुरुआत की थी।

अंतिम संस्कार में खर्च हुए केवल 2 हजार

जमशेदजी टाटा ने अपनी वसीयत लिखते हुए कहा था कि मेरे मरने के बाद क्रियाक्रम में केवल 2 हजार रुपये खर्च किए जाएं। वहीं उन्होंने पूरी संपत्ति को दान में भेंट करने की भी बात की थी। एक तिहाई हिस्सा उन्होंने अपने विश्वविद्यालय के लिए दान किया था और कुछ हिस्सा अपने बेटों को दिया था।

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