कारगिल विजय दिवस : बर्फ के पहाड़ों में छिपे थे सैकड़ों दुश्मन, भारतीय जाबांजों ने खदेड़कर लहराया तिरंगा

कारगिल युद्ध में भारत की जीत के आज 22 साल पूरे हो गए हैं जिसपर देशभर में जश्न मनाया जा रहा है। कारगिल युद्ध का इतिहास पाकिस्तान के धोखे का पर्दाफाश और भारतीय सैनिकों की अमर शौर्य की गाथा का एक जीता-जागता दस्तावेज है। सैनिकों ने जिस वीरता से देश के लिए लड़ाई लड़ी उनकी कहानियां आज भी हमारा सीना गर्व से भर देती है। कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है। आज से 22 साल पहले इसी दिन भारतीय सेना ने कारगिल में पाकिस्तान के कब्जे वाली सभी चौकियों से दुश्मनों को खदेड़ा था। कारगिल युद्ध जम्मू कश्मीर के कारगिल जिले में साल 1999 में मई से जुलाई महीने के बीच हुआ था।

क्यों हुआ था कारगिल युद्ध?

भारत-पाकिस्तान के संबंध विभाजन के बाद से परस्पर प्रतिद्वंदी रहे हैं। 1994 में भारतीय संसद के द्वारा प्रस्ताव भी लाया गया जिसमें स्पष्ट उल्लेखित है कि पाक अधिकृत कश्मीर भारतीय कश्मीर का भाग है, परंतु पाकिस्तान के द्वारा इसे कभी स्वीकार नहीं किया गया। सामरिक और सैन्य दृष्टिकोण से कश्मीर को देखते हुए पाकिस्तान इसे अपना भाग बनाने का प्रयास करता रहा है। दोनों देशों के बीच इन्हीं विवाद से युद्ध की परिस्थितियां बनी रहती है जिसने कारगिल यु’द्ध को भी जन्म दिया।

कारगिल युद्ध के बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि लड़ने वाले सभी कश्मीरी उग्रवादी हैं किंतु युद्ध मे बरामद हुए दस्तावेजों और पाकिस्तानी नेताओं के बयान से यह साबित हुआ की पाकिस्तानी सेना प्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध मे शामिल है। इस युद्ध मे लगभग 30000 भारतीय सैनिक शामिल थे।

भारतीय सेना ने दुश्मनों को कैसे खदेड़ा?

भारतीय सेना और वायु सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जगहों पर हमला किया तथा धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग से पाकिस्तान को वापस जाने को मजबूर किया। भारत ने इस युद्ध को जीता। 3 मई 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा शुरू किए गए इस युद्ध का अंत 26 जुलाई 1999 को भारत के जीत के साथ हुआ।

पाकिस्तानी सेना के करीब 5000 सैनिकों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए 3 मई 1999 को कारगिल के ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। इस बात की जानकारी भारतीय सेना को एक चरवाहे ने दी। भारतीय सेना जब पेट्रोलिंग पर गई तो उन्हें बंधक बना लिया गया तथा 5 जवानों की हत्या कर दी गई।

पाकिस्तानी सेना ने भारतीय पोस्ट को तहस-नहस कर दिया। भारतीय सेना ने सरकार को इसकी जानकारी दी तो पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने का आदेश दिया गया। इस दौरान भरतीय सेना ने ऑपरेशन विजय का आगाज किया और कार्रवाई करते हुए वायु सेना की ओर से मिग-27 व मिग-29 का इस्तेमाल किया।

इस अभियान में लेफ्टिनेंट नचिकेता को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया, पाकिस्तान ने भारतीय विमान मिग-17 को मार गिराया जिससे 4 भारतीय फौजी शहीद हुए। बिगड़ती परिस्थिति को देखते हुए अमेरिका ने हस्तक्षेप करते हुए पाकिस्तान से कहा कि वे अपनी सेना कारगिल से हटा ले लेकिन युद्ध जारी रहा।

दोनो देशों के बीच खूब गोलीबारी हुए, दोनों देशों के सैनिक मारे गए। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना का अपने आक्रमक रवैये से मनोबल गिरा दिया था। भारतीय सैनिको ने पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ते हुए बारी-बारी से अपने सभी पोस्ट पर तिरंगा लहराते गए।

26 जुलाई को हुई कारगिल विजय की घोषणा

लंबे संघर्ष के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 26 जुलाई को कारगिल विजय की घोषणा की। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कारगिल युद्ध को ही इतिहास में सबसे भयावह युद्ध माना जाता है क्योंकि इस युद्ध मे भारी मात्रा में विस्फोटक, रॉकेट, तोप और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया था। इस जंग में भारत ने 527 वीर योद्धाओं को खोया था तथा 1300 से ज्यादा घायल हुए। युद्ध मे 2700 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और लगभग 250  सैनिक जंग छोड़ भाग गए।

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