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उधम सिंह जिसने अंग्रेज अधिकारी की छाती पर मारी गोली, 21 साल बाद लिया जलियांवाला नरसंहार का बदला

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सरदार उधम सिंह एक ऐसा नाम जो देश को आजादी दिलाने की लड़ाई में अग्रणी तौर पर याद किया जाता है। पंजाब का यह क्रांतिकारी के अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए दिए साहस के परिचय को आज भी याद किया जाता है।

आज शहीद उधम सिंह की पुण्यतिथि है औऱ 1940 में आज के दिन ही उन्हें माइकल ओ डायर की हत्या के आरोप में पेंटनविले जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया था। उधम सिंह का असली नाम शेर सिंह था लेकिन ऐसा कहा जाता है कि 1933 में पासपोर्ट बनवाने के लिए उन्होंने अपना नाम बदल लिया था।

बचपन में उठ गया था माता-पिता का साया

उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब में संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था. बचपन में ही माता पिता का साया उठ जाने से उधम सिंह की जिंदगी में मुश्किलें हमेशा से रही। माता-पिता के चले जाने के बाद उधम सिंह अनाथालय में रहते थे।

1919 में हुए जालियांवाला बाग हत्याकांड ने उधम सिंह की जिंदगी में कई बदलाव किए और वह पढ़ाई के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी रूचि दिखाने लगे। एक समय ऐसा आया जब मैट्रिक परीक्षा पास कर चुके उधम सिंह ने अपनी जिंदगी देश के नाम करने का फैसला किया।

वह ‘गदर’ पार्टी से जुड़ गए जिसके बाद उन्हें 5 साल की जेल काटनी पड़ी। जेल से निकलने के बाद वह अपना नाम बदलकर विदेश चले गए।  वहीं लाहौर जेल में उनकी मुलाकात भगत सिंह से भी हुई थी।

माइकल डायर पर दाग दी थी गोलियां

उधम सिंह के साहस का परिचय इसी बात से लगाया जा सकता है कि 13 मार्च 1940 को जब लंदन के कैक्सटन हॉल में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की एक बैठक चल रही थी तब वहां उन्होंने एक अंग्रेज अधिकारी पर गोली चला दी।

इस दौरान एक किताब में पन्नों को काटकर वह बंदूक छुपाकर ले गए और बैठक के बाद उन्होंने माइकल ओ’ड्वायर पर फायर कर दिया जिससे पंजाब के इस पूर्व गवर्नर की मौके पर मौत हो गई।

ब्रिटेन में चला मुकदमा और हुई फांसी

गोली चलाने के बाद उधम सिंह वहीं गिरफ्तार कर लिए गए और ब्रिटेन की अदालत में उन पर मुकदमा चलाया गया। आखिरकार 4 जून 1940 को उधम सिंह को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई।

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