सीकर के इस किसान के दिमाग की देंगे दाद, ऐसे कमा रहा लाखों रुपए…

Kuldeep Bharti Bay Dataramgarh: कुलदीप भारती, बाय, दातारामगढ़ सीकर।
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धरती मां तेरी कोख निराली,
कब जगती कब सोती।
कहां निपजाए ग्वार बाजरा,
और कहां निपजाए मोती।

जैसा दिमाग, वैसी खेती। किसान ने वैसा ही करके दिखाया।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे किसान से रूबरू करवा रहा हूं, जिसकी खेती को देख कर आप भी दंग रह जाएंगे। आज किसान जैसा सोचता है, वैसा ही इस धरती माता से प्राप्त कर सकता है।

परिवार और परिचय।
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सीकर (Sikar) जिले के बाय गांव (Bay Village) के रहने वाले कुलदीप भारती (Kuldeep Bharti) ने हमारे संवाददाता कुलदीप से बातचीत में अपने द्वारा की जा रही खेती के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने बताया कि इस मरू प्रदेश में मोती की खेती करने वाला मैं एकमात्र किसान हूं। और मैं पिछले 7 – 8 वर्ष से मोती की खेती कर रहा हूं। सबसे पहले मेरे दिमाग में नवाचार करने की आई और उसी के अनुसार मैंने सीप को जो वातावरण मिलना चाहिए, वह देने का प्रयास करते हुए इस खेती को प्रारंभ किया।

दिमाग में कैसे आई।
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कुलदीप ने बताया कि मेरे पास जमीन बहुत कम है। तो मैंने छत के ऊपर कुछ करने की सोची। मैंने दोस्तों से सलाह मशवरा किया कि मैं छत के ऊपर क्या कर सकता हूं। घर के लिए सब्जी या अन्य जिससे कुछ पैदा भी किया जा सके।तो काफी सोच विचार करने के बाद में मेरे एक दोस्त ने बताया कि आप मोती की खेती कर सकते हो।
मैं दक्षिण भारत में मोती की खेती के प्रशिक्षण हेतु गया। तो वहां देखा कि बहुत बड़े बड़े अधिकारी नौकरी छोड़ कर मोती की खेती कर रहे हैं। मैंने वहां पर बहुत कुछ सीखा और देखा। यहां पर आकर मैंने कृषि अनुसंधान केंद्र जोधपुर में भी इसका प्रशिक्षण लिया।
मैंने दक्षिणी भारत में मछुआरों के बीच में रहकर पांच सौ सीप निकलवाए और उनको यहां पर लेकर आया। यह मेरे लिए बहुत बड़ी चैलेंज की बात थी। लेकिन मैंने इस काम को शुरू कर दिया।
काम को शुरू करने के बाद में मेरे चार सौ पचास सीप मर चुके थे।अब केवल पचास सीप मेरे पास थे।उनसे कुछ रिजल्ट मिलने की आशा हो रही थी, तब मैंने कृषि अनुसंधान केंद्र से मेरे स्वयं के खर्चे से वैज्ञानिक टीम को बुलाया। और काफी कुछ रिसर्च के बाद में जो गलतियां कर चुका था उनका मंथन शुरू किया और मैंने एक बार पांच सौ और फिर एक हजार सीप और मंगवाई। और आगे बढ़ना शुरू किया।

सम्मानित होना।
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मैंने घर छोड़ कर एक झील में काम करना शुरू किया। वहां ज्यादा बड़ी सफलता मिलनी शुरू हो गई। राजस्थान सरकार के अधिकारी व वैज्ञानिकों की टीम मेरे पास में आई व किसानों को प्रशिक्षण देने हेतु मुझे बुलाया गया। मैं कोटा गया,उदयपुर (Udaipur) में भी  मैंने किसानों को इसका डेमो दिया है। पूरे भारत से मेरे पास इसके प्रशिक्षण हेतु आते रहते हैं।तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय वसुंधरा राजे सिंधिया (Former CM Vasundhra Raje Sindhiya) द्वारा मुझे सबके सामने सम्मानित भी किया गया है।
पहले घर परिवार से तथा उसके बाद में समाज और गांव से नकारात्मक टिप्पणियों का मुझे सामना करनापड़ा।लेकिन सबको समझाने में सफल हुआ। मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। आज मेरी सफलता का मुख्य कारण परिवार है। जिसने हमेशा मेरा पूरा साथ दिया है। मैं लक्ष्य के प्रति अडिग रहने वाला व्यक्ति हू।

अन्य
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सीप को तैयार करने से पहले हमें सीप के रख रखाव, उसकी भोजन व्यवस्था, आदि हेतु वातावरण तैयार करना, उसके किसी प्रकार की बीमारी नहीं लगे, ऐसा पूरा प्रबंध करना पड़ता है। उसके बाद में सीप की सर्जरी करनी पड़ती है, फिर सीप बनने का आधार तैयार होता है।
सीप के अच्छी रखरखाव होने के बाद में सीप के अंदर की सर्जरी करते हैं। सर्जरी करते समय उसमें जिस प्रकार की आकृति चाहते हैं। एक साल बाद में उसी आकृति का मोती तैयार मिलता है,यदि दिलकी आकृति का अच्छा मोती तैयार मिल गया, तो उसकी बाजार कीमत डेढ़ से दो लाख रुपए मिलती है। Kuldeep Bharti Bay Dataramgarh

अपने विचार।
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बुद्धि संग मेहनत करो,
जग जाए किस्मत रोती।
अन्न धन का भंडार भरो,
और निपजाओ मोती।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

पूरा इंटरव्यू देखें…

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