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लोकसभा में पास हुआ OBC आरक्षण पर राज्यों को अधिकार देने वाला बिल, समझिए इसके पीछे का पूरा गणित

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संसद के मानसून सत्र में बीते सोमवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक अहम संविधान संशोधन बिल पेश किया जिसके मुताबिक अब राज्य ओबीसी जनसंख्या की लिस्ट तैयार कर सकते हैं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया जिसको सर्वसम्मति के साथ सदन से पास किया गया। बता दें कि हाल में केंद्रीय कैबिनेट ने इस बिल पर मुहर लगाई थी. वहीं इस संशोधन की मांग पिछले कई दिनों से कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं के अलावा सत्ताधारी पार्टी के ओबीसी नेताओं की तरफ से की जा रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने की मामले में दखल

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देकर कहा था कि केवल केंद्र को ये अधिकार है कि वह ओबीसी लोगों से जुड़ी लिस्ट तैयार करें. हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों ने इस पर आपत्ति जताई थी जिसके बाद केंद्र सरकार संविधान संशोधन बिल लाकर इसे कानूनी रूप देना चाहती थी।

आइए जानते हैं केंद्र सरकार के इस बिल से क्या बदलेगा?

OBC आरक्षण से जुड़ा बिल क्या है?

OBC आरक्षण से जुड़ा यह बिल 127वां संविधान संशोधन बिल है जो आर्टिकल 342A(3) के तहत लागू होगा। बिल के लागू होने के बाद अब राज्य सरकारें केंद्र सरकार पर निर्भर रहे बिना अपने हिसाब से ओबीसी समुदाय की लिस्ट तैयार कर सकेंगी।

केंद्र सरकार को क्यों लेकर आना पड़ा बिल?

दरअसल, इसके पीछे की कड़ी 5 मई को मराठा आरक्षण के मामले में फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी है जब कोर्ट ने कहा था कि ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास रहेगा।

वहीं आरक्षण जैसे संवेदनशील मामले में केंद्र सरकार कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती है. इसलिए उस दौरान भी केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति जताई थी. इसलिए अब इस पर संविधान संशोधन बिल लाकर इस पूरे मामले को कानूनी रूप दिया जा रहा है।

बिल के बाद क्या बदलेगा?

बिल के कानून बनने के बाद अब राज्य सरकारें सीधा खुद से अपनी ओबीसी लिस्ट बना सकती है। वहीं इस कानून से उन राज्यों में कुछ प्रभावशाली जातियों को फायदा होगा जो समय समय पर ओबीसी आरक्षण की मांग करती रही है, जैसे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय और हरियाणा में जाट समुदाय।

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