8 टांके लगने के बाद रिंग में उतरे, कुमाऊं रेजिमेंट के इस जवान ने रखी खेल भावना की जिंदा मिसाल

खेल एक ऐसा पवित्र काम है जिसे बिना खेल भावना के खेला जाना असंभव है. बिना खेल भावना के कोई भी खेल नहीं खेला जा सकता है. आज हम जिसकी कहानी बताने जा रहे हैं वो खेल भावना को साकार करने की जिंदा मिसाल है. हम बात कर रहे हैं 11 कुमाऊं रेजिमेंट के सूबेदार मेजर सतीश कुमार की जिनका नाम शायद बीते कुछ दिनों से आपकी नजरों से गुजरा हो।

सूबेदार मेजर सतीश कुमार भारत के 91 किलोग्राम वर्ग के सुपर हैवीवेट मुक्केबाज हैं जिन्होंने हाल के टोक्यो ओलंपिक में दुनिया के सामने यह साबित कर दिया कि एक फौजी कभी हार नहीं मानता है.

8 टांके लगवाकर सतीश रिंग में उतरे

टोक्यो ओलंपिक के प्री क्वार्टर फाइनल के दौरान सूबेदार मेजर सतीश कुमार को गहरी चोट का सामना करना पड़ा. प्री-क्वार्टर मैच में उनके सामने जमैका के रिकार्डो ब्राउन थे जिनके पंच से सतीश की ठुड्डी और दाहिनी आंख पर गहरा घाव लगा. हालांकि सतीश ने इस हाल में भी प्री-क्वार्टर फाइनल में जीत हासिल की।

घाव की वजह से आंख के पास 8 टांके लगने के बाद सतीश पूरे साहस के साथ रिंग में उतरे    और वर्ल्ड चैंपियन उज्बेकिस्तान के बोखोदिर जोलोलोव को कड़ी टक्कर दी।

खेल भावना की जिंदा मिसाल सतीश कुमार

अपने आखिरी मुकाबले में सतीश को हार मिली लेकिन उन्होंने आखिरी सैकेंड तक खेल भावना को बचाए रखा. आज ओलंपिक संघ ही नहीं बल्कि दुनिया भर में उनकी हिम्मत की तारीफ हो रही है. खेल में दिखाई देने वाला यह एक सेना के जवान का पराक्रम ही है जो कुमाऊं रेजिमेंट सूबेदार मेजर सतीश कुमार ने बरकरार रखा.

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