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असम-मिज़ोरम विवाद : दो राज्यों की पुलिस में खूनी झड़प, जानिए क्या है इस सालों पुरानी लड़ाई की जड़

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भारतीय इतिहास में सोमवार को एक ऐसी घटना हुई जहां देश में दो राज्यों की पुलिस ने एक-दूसरे पर हथियार तान दिए। असम और मिजोरम के बीच सालों से चल रहा जमीनी विवाद सोमवार को हिंसक हो गया जिसमें दोनों राज्यों की पुलिस और नागरिकों के बीच जमकर गोली-पत्थर चले।

बताया जा रहा है कि कछार जिले में सीमा के पास हुई इस घटना में असम पुलिस के 5 पुलिसकर्मियों की मौत हुई है वहीं जिले के एसपी समेत 50 से ज्यादा लोग घायल हैं।

वहीं सीमा पर चल रहे टकराव के बीच दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर एक दूसरे के साथ आरोप-प्रत्यारोप खेल रहे थे। विवाद के तूल पकड़ने के बाद दोनों राज्यों की सरकारों ने केंद्र सरकार से मामले में शांति बहाली के लिए आग्रह किया।

आपको बता दें कि असम में फिलहाल भाजपा की सरकार है और मिजोरम में भाजपा नीत पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (नेडा) में शामिल मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की सरकार है। मालूम हो कि गृहमंत्री अमित शाह ने हाल में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों के साथ सीमा विवाद को लेकर शिलांग में बैठक की थी।

दोनों राज्यों के बीच सालों पुराना सीमा विवाद

असम की बराक घाटी के कछार, करीमगंज और हाइलाकांडी जिलों की करीब 164 किलोमीटर लंबी सीमा मिजोरम के तीन जिलों आइजोल, कोलासीब और मामित के साथ जुड़ती है। इन्हीं इलाकों में अगस्त 2020 और इस साल फरवरी में भी संघर्ष हुए थे।

असम और मिज़ोरम के बीच जमीनी विवाद औपनिवेशिक काल से चलता आ रहा है। 1972 तक मिज़ोरम असम का हिस्सा हुआ करता था जिसे लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था।

विवाद की जड़ 1875 की एक अधिसूचना है जिसमें लुशाई पहाड़ियों को कछार के मैदानी इलाकों से अलग करने की बात कही गई थी। मिज़ोरम असम के साथ था लेकिन मिज़ो आबादी और लुशाई हिल्स का क्षेत्र निश्चित था।

अब मिज़ोरम की सरकार इसी के मुताबिक अपनी सीमा का दावा करती है तो दूसरी तरफ असम सरकार 1933 में चिन्हित की गई सीमा के अनुसार जमीन पर अपना हक बताती है। ऐसे में विवाद दोनों राज्यों की एक-दूसरे पर ओवरलैप करते हुए जमीन के हिस्से को लेकर है जिस पर दावा कोई छोड़ने को तैयार नहीं है।

वहीं मीजो समुदाय के लोगों की शिकायत है कि 1933 में सीमा को लेकर जारी नोटिफ़िकेशन में उनसे चर्चा नहीं की गई। इसके अलावा बीते एक साल से झड़प की घटनाओं में तेजी देखने को मिली है जिसका कारण है कि सीमावर्ती इलाक़े में जनसंख्या बढ़ना और मामले का राजनीतिकरण होना भी एक बड़ी वजह है।

फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घटना के बाद असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों से बात कर शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए कहा है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने गृह मंत्री को आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।

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