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बकरीद पर शैतान को क्यों मारे जाते हैं पत्थर और क्यों देते हैं कुर्बानी ?

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इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद आज देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। ईद-उल-अजहा, ईद उल फितर के ठीक 70 दिन बाद होता है।

बकरीद पर अल्लाह की इबादत यानि नमाज के बाद जानवर की कुर्बानी देने की रस्म अदा की जाती है जिसका गोश्त गरीब तबकों और जरूरतमंद लोगों में बांट दिया जाता है।

यह तो हम काफी समय से जानते ही हैं कि ईद के दिन कुर्बानी दी जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन शैतान को पत्थर मारने की परंपरा भी की जाती है। ऐसे में आज ईद-उल-अजहा के मौके पर आइए जानते हैं क्यों मारा जाता है शैतान को पत्थर और इसके पीछे क्या वजह है।

हजरत इब्राहिम से जुड़ी है पत्थर मारने की परंपरा

इस्लाम धर्म में तीर्थ के रूप में हज यात्रा की जाती है जिसके आखिरी दिन कुर्बानी देने की परंपरा होती है। इस दिन रमीजमारात पहुंचकर शैतान को पत्थर मारे जाते हैं।

इसके पीछे यह माना जाता है कि हजरत इब्राहिम जब अल्लाह को अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए जा रहे थे तो रास्ते में एक शैतान ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की थी जिसके बाद हजयात्री शैतान के रूप में तीन खंभों को पत्थर मारते हैं।

कुर्बानी में क्या होता है?

ईद-उल-अजहा के दिन इस्लाम धर्म से जुड़े लोग बकरी या ऊंट जैसे किसी जानवर की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के बाद जानवर का गोश्त तीन हिस्सों में बांटा जाता है जिसमें एक गरीबों में तो दूसरा रिश्तेदारों में देने के बाद तीसरा हिस्सा घर के लिए होता है।

बकरीद कब से मनाने लगे ?

बकरीद के पीछे की कहानियों में ऐसा माना जाता है कि एक बार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा ली और कहा कि जो सबसे प्यारी चीज है उसको कुर्बान कर दें। अब हजरत इब्राहिम ने उनके हुक्म के आगे अपने बेटे हजरत ईस्माइल की कुर्बानी देना सही समझा जो 80 साल की उम्र में उनके घर आया था और बेहद प्यारा था।

हजरत इब्राहिम ने अल्लाह का नाम लेकर बेटे की कुर्बानी दी लेकिन जब आंख खोली तो देखा उनका बेटा जिंदा है और जिस जगह कुर्बानी दी वहां एक बकरा है, इसके बाद से लोग इस दिन की याद में बकरीद मनाने लगे।

कुर्बानी किसके नाम पर होती है?

कुर्बानी देने के लिए जानवर के साइज के हिसाब से उसके हिस्से किए जाते हैं और कुर्बानी में जितने हिस्से होते हैं उतने ही लोगों को शामिल किया जाता है और उनके नाम पर ही कुर्बानी दी जाती है।

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