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भोपाल

कोरोना मरीज़ों की मदद के लिए बेच दिए अपनी बीवी के गहने, ऑटो एम्बुलेंस ड्राइवर की इंसानियत की मिशाल

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जहां एक और पूरे देश के तमाम शहरों से तमाम अस्पतालों से रोजाना आती तस्वीरें चिंता बढ़ती हैं। तो वहीं कुछ ऐसे भी जगह हैं जहां से मन को शांत करने वाली और इंसानियत को जिंदा रखने वाली तस्वीरें सामने आ रही है। आपको बताएं कि देश में कोरोना की लहर इतनी तेज हो चुकी है कि उसने राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना महामारी से मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,उत्तर प्रदेश,गुजरात जैसे बड़े राज्यों हैं चपेट में आ चुके हैं।

इसी के चलते रोजाना ऐसी तस्वीरें सामने आ रही है जहां से लोगों में चिंता बढ़ती हुई नजर आ रही है। लोगों में डर का माहौल बन चुका है। रोजाना आती हुई तस्वीरें यह बयां करती हैं कि किस तरीके से मरीजों को बेड के लिए, ऑक्सीजन के लिए दरबदर भटकना पड़ रहा है।वहीं उनके परिजन भी ऑक्सीजन के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े होते हुए नजर आ रहे हैं। वही एंबुलेंस का नाम मिलना भी मरीजों के लिए एक बड़ा और चिंता का विषय बन गया है। कुछ लोगों ने तो आपदा को अवसर में बदलकर कालाबाजारी को चरम सीमा पर पहुंचा दिया है।

लेकिन इन सभी के बीच में मन को शांत करने वाली और चिंता को दूर करने वाली तस्वीर सामने आई है। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऑटो ड्राइवर की तस्वीर सामने आई हैं। तस्वीर में ऑटो ड्राइवर हैं जिनका नाम जावेद खान है। जावेद खान एक ऑटो ड्राइवर हैं और भोपाल में 200 300 रुपए रोजाना कमाने के लिए ऑटो चलाते हैं। लेकिन जब जावेद ने देखा कि भोपाल में कोरोनावायरस अपने चरम पर है और लोग एंबुलेंस और ऑक्सीजन के लिए परेशान हो रहे हैं तो उन्होंने अपने ऑटो को एंबुलेंस में ही तब्दील कर लिया।

आपको बताएं कि उन्होंने अपने ऑटो में एक ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगाया साथ ही लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ऑटो को एंबुलेंस में तब्दील कर लिया और फ्री में लोगों को अस्पतालों तक पहुंचा रहे हैं। अपने स्वार्थ की चिंता ना करते हुए जावेद ने ना धर्म देखा है न जाति देखी है सिर्फ़ निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं। पिछले 15 से 20 दिनों से जावेद यह काम कर रहे हैं और अब तक लगभग 10 मरीजों को अस्पताल फ्री में पहुंचा चुके हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है वह यह है कि जावेद ने इस काम के लिए अपनी पत्नी की ज्वेलरी तक बेच दी और जुट गए निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा में।

इसी तरीके की तस्वीर पिछले दिनों महाराष्ट्र के नागपुर से भी आई थी जहां 85 साल के बुजुर्ग ने एक जवान संक्रमित व्यक्ति के लिए अपना बेड छोड़ दिया और महज 3 दिन बाद वह इस दुनिया को अलविदा कह गए।

देश मे ऐसी आती हुई तस्वीरें दिल को शांत करने वाली होती है। वह बताती हैं कि इंसानियत दुनिया के अंदर अभी भी जिंदा है। जिस तरीके से लोग गरीबों को खाना बांट रहे हैं,ऑटो को एंबुलेंस में तब्दील कर रहें हैं, अपने स्वार्थ और स्वास्थ्य की परवाह न करते हुए लोगों को बेड दे रहे हैं तमाम तरह की अन्य सेवा में लोग जुटे हैं वह इस कोरोना माहमारी में कुछ राहत देने वाली साबित होती नजर आ रही हैं।

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