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महाराष्ट्र

81 साल के बाबा खैराजी चलाते हैं लंगर, 30 लाख लोगों को खाना खिलाकर पेश की मानवता की अद्भुत मिसाल

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साल 2020 में कोरोना का लॉकडाउन लगने के बाद 24 मार्च, 2020 के बाद देश ने अभी तक की सबस बड़ी प्रवासी मज़दूरों की त्रासदी देखी है। लोगों का रोजगार चला गया, कुछ के सामने भूखमरी पैदा हो गई।

प्रवासी मज़दूरों का एक काफिला पैसे नहीं होने के कारण पैदल ही अपने-अपने गांव के लिए चल पड़े, ऐसा देखते हुए अन्य मजदूर भी उनके साथ पलायन करने लगे। कोरोना काल के इस भयावह दौर में कुछ लोग मसीहा बनकर भी सड़कों पर उतरे और लोगों को हर संभव सहायता पहुंचाई।

कोरोना काल में रामबाण साबित हुआ बाबा का लंगर

इस दौरान 81 साल का एक बुजुर्ग लोगों का पेट भरने के लिए सड़क पर उतरा और मुंबई के यवतमाल इलाके में एक प्लास्टिक की चादरों से ढ़के टीनशेड में खैरा बाबाजी के नाम से मशहूर बाबा करनैल सिंह ने लंगर चलाया जो उस दौरान लाखों लोगों के लिए रामबाण साबित हुआ।

कोरोना काल में पिछले साल से लगातार खैरा बाबाजी लोगों की मदद कर रहे हैं और खाना खिला रहे हैं, हाल में गुजरी कोरोना की दूसरी लहर में भी उन्होंने लंगर चलाया है, एक अनुमान के मुताबिक पिछले 2 महीनों में वह 20 लाख लोगों को खाना खिला चुके हैं। वहीं बार खैरा जी बाबा ने खाने के अलावा 15 सिलेंडर का एक छोटा ‘ऑक्सीजन बैंक’ की भी शुरूआत की जिसके जरिए लोगों को फ्री में ऑक्सीजन दी गई।

खैराबाबा जी यूपी के मेरठ के रहने वाले हैं और 11 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और खुद का जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया औऱ तब से आज तक वह लोगों की सेवा कर रहे हैं।

30 लाख से अधिक लोगों को खिला चुके हैं खाना

बाबाजी का लंगर जहां चलता है वह इलाका आदिवासी क्षेत्र कहलाता है जहां सैकडों किलोमीटर तक खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। बाबा का लंगर 24 घंटे चलता है जहां दिन भर हजारों लोग खाना खाते हैं।

‘गुरु के लंगर’ में पिछले 30 सालों से ऐसे ही लोग यहां के खाने का स्वाद चख रहे हैं। बाबा के मुताबिक अभी तक करीब यहां 30 लाख लोग खाना खा चुके हैं। बाबा के लंगर में 17 लोग काम करते हैं जिसमें 11 रसोइए हैं। वहीं कुछ अन्य लोग भी काम करते हैं।

बाबा के भाई ने की लंगर खोलने में मदद

किसी भी काम को करने के लिए शुरूआत में कुछ पैसों की जरुरत होती है ऐसे में खैरा बाबाजी के छोटे भाई गुरबक्श सिंह खैरा विदेश में रहते हैं जिनकी मदद से लंगर में खाने-पीने की वयवस्था हुई। आपको बता दें कि बाबा के लंगर में लोगों के अलावा रोज सैकड़ों जानवरों को भी खाना खिलाया जाता है।

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