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पंजाब

101 वर्षीय बुजुर्ग ने पेश की खुद्दारी की मिसाल, सरकारी मदद लेने से किया इनकार कहा कमाकर खा लूंगा

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आपने सरकारी सहायता के लिए भटकते हुए लोग देखे होंगे, सरकारी विभागों के बाहर लगी लंबी लाइनें देखी होगी लेकिन क्या आपने कभी ऐसा वाकया सुना जहां सरकारी मदद हाथ में आने के बाद कोई उसे ठुकरा दे।

ऐसी ही खुद्दारी और खुद पर भरोसे का जीता-जागता उदाहरण है पंजाब के मोगा में रहने वाले 101 साल के बुजुर्ग हरबंस सिंह जो इस उम्र में भी मोगा के अमृतसर रोड पर आलू-प्याज की रेहड़ी लगाकर अपना गुजारा करते हैं।

बुजुर्ग की कहानी जब मुख्यमंत्री तक पहुंची उन्होंने मदद के लिए सरकारी अधिकारियों को वहां भेजा लेकिन बुजुर्ग ने साफ तौर पर मदद लेने के इनकार कर दिया, पर क्यों?

वैसे हुआ यह कि बुजुर्ग को रेहड़ी लगाते देख मुख्य़मंत्री ने खुद अधिकारियों को भेजकर पुछवाया कि क्या उन्हें किसी मदद की जरूरत है तो बताएं सरकार आपकी पूरी सहायता करेगी। जिस पर बुजुर्ग हरबंस सिंह ने कहा कि उनके पास ईश्वर का दिया सब कुछ है और अब कुछ नहीं चाहिए।

26 साल के थे तब मिली थी आजादी

अमृतसर रोड़ पर दशमेश नगर के रहने वाले हरबंस सिंह को आज इतना ही याद है कि जब भारत को 15 अगस्त, 1947 को आजादी मिली थी उस समय वह 26 साल के थे।

हरबंस का बेटा मंगत सिंह ई-रिक्शा चलाता है जिसके दो बच्चे बेटी निशा व बेटा सहज पढ़ाई करते हैं। वहीं एक बेटे की कुछ समय पहले मौत हो गई जो फल बेचा करता था।

रेहड़ी लगाने से खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं!

हरबंस बताते हैं कि वह रोज रेहड़ी लगाने आते हैं, काम करते रहते हैं इसलिए आज इस उम्र में भी स्वस्थ हैं। वह बताते हैं कि हर दिन वह सुबह 4 बजे मंडी जाकर सामान खरीदते हैं। उनका मानना है कि वह खुद को स्वस्थ रखने के लिए रेहड़ी लगाते हैं।

सरकारी मदद को घर की चौघट से ठुकराया

पंजाब के मुख्यमंत्री के कहने पर बुजुर्ग हरबंस सिंह के पास डीसी से लेकर तहसीलदार और एसडीएम तक पहुंचे और सहायता करने के लिए कहा लेकिन उन्होंने आखिर तक यही जवाब दिया कि ईश्वर का दिया उनके पास सब कुछ है। अधिकारियों को भी हैरानी हुई कि उन्होंने इतना खुद्दार इंसान जिंदगी में नहीं देखा।

अब सीएम देंगे 5 लाख का चेक

हरबंस सिंह की खुद्दारी देखकर अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें 5 लाख देने की घोषणा की है। आपको बता दें कि हरबंस सिंह का परिवार पाकिस्तान के लाहौर जिले के सराय थानेवाला गांव से ताल्लुक रखता था जो बंटवारे के बाद भारत आ गए थे।

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