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अजमेर

विश्व विख्यात चामुंडा माँ का अद्भुत मंदिर जहाँ दिन में 3 बार तलवारों से होती माता की आरती

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देवी देवता प्यार का भूखा,
इंसानों से प्यार करो।
कोई भी भूखा रह ना जाए,
ऐसा ही इजहार करो।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको अजमेर (Ajmer) से दो किलोमीटर दूर ,फाई सागर रोड (foy sagar road) पर चामुंडा माता के मंदिर (Chamunda Mata Mandir) की कहानी बताने जा रहा हूं। मंदिर के पुजारी ने खुशबू से बात करते हुए वहां की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस मंदिर की स्थापना विक्रम संवत 1140 में हुई थी। गांव वालों ने आपसी सहयोग से एक छोटे से मंदिर का निर्माण किया था। फाई सागर बोराज गांव के आपसी सहयोग से धीरे-धीरे इस मंदिर का विकास होता गया। आज यह मंदिर cर बन गया है।

बोराज गांव (Boraj Village) वालों को मां भवानी ने पर्चा दिया था,और माता की मूर्ति अपने आप जमीन से प्रकट हुई। आपसी सहयोग से गांव वालों ने पहाड़ी के ऊपर माता की मूर्ति को स्थापित की, और मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर बनने के बाद में माता ने फिर दर्शन दिए और उसके बाद में हर रविवार को तीन बार तलवारों के साथ आरती होती है।

नवरात्रों में, अष्टमी के दिन, हर रविवार की तरह माता के प्रांगण में भारी भीड़ रहती है। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से माता के मंदिर में मन्नत लेकर आता है उसकी मन्नत पूरी होती है।
प्रत्येक रविवार की आरती के बारे में पंडित जी ने बताया सुबह चार बजे मां भवानी का चोला चढ़ता है,फिर पांच बजे पूजा होती है उसके बाद में लोगों का आना-जाना शुरू हो जाता है। दोपहर को फिर आरती होती है, और सांयकाल छोटी आरती होती है। तीनों आरती शंख, नगाड़ा, त्रिशूल और तलवारों के साथ में होती हैं।

तीनों आरती एक एक घंटे की होती है। सुबह की आरती के साथ पंचतत्व का भोग चढ़ाया जाता है। जिसमें अपनी मन्नत के अनुसार भोग चढ़ाते हैं। प्रति वर्ष एक बार सावन मास की अष्टमी को मेला लगता है।

माता की मूर्ति के अगल-बगल में काला भैरव और गोरा भैरव की मूर्तियां विराजमान है। इसके अलावा दूसरी तरफ इशारा करते हुए पंडित जी ने जोगणी माता का मंदिर (Jogni Mata Mandir) बताया। नीचे भेरुजी महाराज (Bheruji Maharaj) का एक और मंदिर होना बताया। ऊपर शिव जी महाराज (Shivji Maharaj Mandir) का मंदिर और गंगा मां है। गंगा मां (Ganga Mai Mandir) ढाई फुट से ना कम होती है और न ज्यादा होती है।

गंगा माता (Ganga Mata) के पानी को कितना भी खर्च करो, कभी कम नहीं होता है। गर्मियों के अंदर ठंडा रहता है,। और सर्दियों के अंदर गर्म रहता है। गंगा माता के पानी के बारे में पंडित जी ने बताया कि किसी को नहीं मालूम कि कहां से आता है। मंदिर का पूरा निर्माण कार्य गंगा माता के पानी से ही किया हुआ है।

माता के मंदिर में पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) पूजा करने के लिए आया करते थे। और जब भी वह युद्ध के मैदान में जाते थे, तो पहले माता का आशीर्वाद लेकर ही जाते थे। खुशबू ने वहां पर आए हुए सभी आगंतुकों से बात की, तो सभी ने माता जी की अपने अपने शब्दों में तारीफ की। जो एक बहुत बड़े विश्वास का सबूत था।

अन्य।
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अपने समय में महाराजा पृथ्वीराज चौहान तारागढ़ से रोज माता के दर्शन करने के लिए आते थे।

” जय झलको _____जय राजस्थान।”

अपने विचार।
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तन मन धन से सेवा करो,
और मन में हो विश्वास।
जीवन क्षणभंगुर है,
मानव सेवा सबसे खास।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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