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अजमेर

विश्व प्रसिद्ध पुष्कर के मेले की खास बातें !! एकमात्र ब्रह्माजी के मंदिर का रहस्य

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भारत के अंदर जिन पवित्र स्थलों को अधिक प्रसिद्ध है और मैं पुष्कर का मेला और पुष्कर का मंदिर प्रसिद्ध है। पुष्कर के नामकरण के पीछे एक पौराणिक कहानी है, कहते हैं कि भगवान ब्रह्मा ने अन्य देवताओं की तरह पृथ्वी पर प्रार्थना नहीं किए जाने के मसले पर चिंता व्यक्त की।उसे पृथ्वी पर अपने नाम पर एक स्थान रखने की इच्छा थी। इसलिए उसने एक कमल का फूल फेंका और जहां फूल गिरा वह जगह पुष्कर कहलायी।

पुष्कर देश का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां भगवान ब्रह्मा का मंदिर है ।माना जाता है कि मंदिर के चारों तरफ सरोवर को 33 मिलियन हिंदू देवताओं द्वारा कार्तिक पूर्णिमा की रात को पवित्र किया जाता है।पुष्कर मेला 100 साल से भी अधिक पुराना है।शुरू में इस मेले का आयोजन हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक के चंद्र माह मे कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता था।

यह मेला अनेकों दृष्टि से बहुत प्रसिद्ध है।तमाम विदेशी लोग यहां भ्रमण के लिए आते रहते हैं।कई प्रकार के सांस्कृतिक मेले, कई प्रकार के आयोजन आदि होते रहते हैं। मेले में आने वाले श्रद्धालु पुष्कर की झील में स्नान करते हैं यह झील पवित्र मानी जाती है।एडवेंचर में रूचि रखने वाले लोग कैंप या गर्म हवा के गुब्बारे की सवारी का आनंद उठा सकते हैं। डेजर्ट सफारी में, घोड़ों पर, आदि का पर्यटक लुत्फ़ उठाते हैं।विदेशी पर्यटकों की संख्या एक बड़ी तादाद के रूप में होती है। झील के चारों ओर 52 स्नान घाट बने हैं जिनमें से कुछ प्रजनन क्षमता के लिए नाग कुंड, सुंदरता के लिए रूप तीर्थ में है।

हिंदू कैलेंडर की कार्तिक माह के पखवाड़े में यहां पवित्र जल से स्नान करना सौभाग्य की बात माना जाता है।मान्यता यह है कि यहां पर दिन में डुबकी लगाने से के ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है। पुष्कर में ऊंट मेला भी लगता है।स्थानीय लोग अपने ऊंटो को लेकर यहां आते हैं।बेचने की प्रक्रिया शुरू होती है।कई प्रकार के नृत्य होते हैं।अलग ढंग की प्रस्तुतियां होती हैं।

पुष्कर जाने के लिए आप राजधानी जयपुर से भी जा सकते हैं।यूं बाय रोड पुष्कर जयपुर से 140 किलोमीटर दूर है।बस अथवा टैक्सी करके भी आप पहुंच सकते हैं।पुष्कर में ट्रेन की व्यवस्था नहीं है यदि ट्रेन से आप जाना चाहे तो आपको पहले अजमेर जाना होगा।अजमेर से पुष्कर की दूरी महज 30-32 किलोमीटर है।

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