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अलवर

जल’ती हुई ज्योत को खुद अपने हाथों में लेकर प्रकट हुई अलवर की करणी माँ,श्राप से मुक्ति की कहानी

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शंका मतना राखियो, शंका नाश का मूल।
बनता काम ना बने, मत करियो ये भूल।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको अलवर (Alwar) के करणी माता मंदिर के रहस्य के बारे में बता रहा हूं। यह करणी माता का मंदिर (Karni Mata Ka Mandir) तीन सौ पचास साल पुराना है। उस समय महाराजा बख्तावर सिंह जी यहां पर राज करते थे।

अपनी अलवर यात्रा (Alwar Tour) पर निकली हुई खुशबू ने जब करणी माता के मंदिर के बारे में बखान करते हुए कहा कि करणी माता के पास में त’लवार तथा त्रि’शूल रखे हैं। पास में क’टार रखी हुई है, ऊपर चांदी का छत्र है और बहुत सुंदर सजावट की हुई है। करणी माता के रहस्य के बारे में जब पंडित जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि जब करणी माता को आव्हान किया। तब करणी माता प्रकट हुई और श्राप का निवारण कर महाराजा को जीवनदान दिया।

उस समय महाराजा ने करणी माता का मंदिर बनाया था। वैसे तो करणी माता के बहुत मंदिर है लेकिन मुख्य मंदिरों में केवल दो ही मंदिर है। एक देशनोक (Deshnok) बीकानेर (Bikaner) में करणी माता का मंदिर और दूसरा यह अलवर के सरिस्का अभ्यारण (Sariska Sanctuary) में करणी माता का मंदिर।

जब पंडित जी से पूछा कि आप यहां पर कितने समय से है तो उन्होंने बताया कि हम तो पीढ़ियों से यहां पर पूजा पाठ कर रहे हैं। यह हमारा वंशानुगत पेशा है। यहां पर जो भी दर्शनार्थी मंदिर में आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

जब करणी माता का आवाहन किया गया था उस समय बख्तावर सिंह की दूसरी पत्नी रूप कंवर ने देशनोक की करणी माता मंदिर से ज’लती हुई जोत हाथ में लेकर यहां पर आई थी। तब करणी माता ने प्रकट होकर महाराजा बख्तावर सिंह को जीवनदान दिया था।

बीकानेर की चमत्कारिक करणी माता मंदिर की कमाल की अद्भुत कहानी

यहां पर करणी माता के मंदिर में हर सीढ़ी पर छोटे-छोटे मकान बने हुए हैं। हजारों की तादाद में मकान बने हुए हैं। हर दर्शनार्थी जब यहां पर आता है, तब यह मकान बनाकर जाता है कि इसी प्रकार के मेरे भी मकान बने।

वहां पर करणी माता के मंदिर के पास में हनुमान जी का मंदिर (Hanuman Ji Ka Mandir), राम दरबार (Ram Darbaar), भेरुजी महाराज का मंदिर (Bheruji Ka Mandir) है। करणी माता का मंदिर पहाड़ों के बीच में बना हुआ है जो की धरातल से 170 सीढ़ीयां ऊपर ऊंचाई पर जाकर बना हुआ है। वहां का वातावरण इतना शुद्ध है कि बीमार आदमी भी ऐसी शुद्ध हवा खाकर ठीक हो जाता है। वहां पर शिव दरबार है उसके पास में हवन कुंड बना हुआ है जहां पर समय-समय पर हवन किया जाता है।

मंदिर के इतिहास के बारे में पुजारी जी ने बताया कि एक बार महाराज बख्तावर सिंह की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद उन्होंने कई वैध बुलाए व कई अन्य घेरलू उपचार किए लेकिन किसी भी तरीके का आराम महाराज को नही मिला। जिसके बाद महाराज की सेना में मौजूद रहने वाले चरण के कहने पर महाराज ने करणी माता का ध्यान लगाया।

इसके बाद माता रानी की इतनी कृपा हुई थी कि माता ने सफेद चील के रूप में आकर महाराज बख्तावर को दर्शन दिए। फिर उनकी खराब तबीयत के लिए उपाय भी बताएं जिसके बाद महाराज बख्तावर ने माता के द्वारा बताए गए सभी उपायों को अपनाया और स्वस्थ हो गए। तब महाराज बख्तावर ने अलवर के बाला किला क्षेत्र में करणी माता के मंदिर का निर्माण करवाया था।

बीकानेर वाली करनी माता की तर्ज पर है मंदिर

हम आपको जानकारी के लिए बता दें कि राजस्थान की ही बीकानेर जिले में करणी माता का मंदिर है। उसी मंदिर की तर्ज पर अलवर में स्थित इस करणी माता के मंदिर का भी निर्माण करवाया गया था। वही माता के मंदिर में जाने के लिए 2 मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। सड़क मार्ग व किशन कुंड मार्ग का प्रोयग करके मंदिर में भक्त दर्शन के लिए किए जाते हैं।

वन क्षेत्र के अधीन है इलाका, सफारी की भी व्यवस्था

वही यह पूरा इलाका वन क्षेत्र के आधीन आता है। प्रताप बंद गेट पर वन विभाग की चौकी भी यहां मौजूद है। इसके अलावा भक्तों के लिए सफारी की व्यवस्था भी की गई है। पर्यटक सफारी देखने के लिए भी पहुंचते हैं। राजस्थान की खूबसूरती के साथ भगवान के दर्शन का नजारा यहां देखने लायक होता है। इसी को देखने के लिए दुनिया भर के लोग यहां पहुंचते हैं।

दो बार भरता है मेला

अलवर में स्थित करणी माता का मेला दो बार साल में भरता है। नवरात्रि के समय यहां पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। वही मंदिर के पुजारी जी ने बताया है कि इस बार कोविड-19 यानी कोरोनावायरस के चलते सरकार की गाइडलाइंस का पूरा पालन किया जा रहा है। माता की सजावट फुल प्रसाद भंडारे आदि की सभी व्यवस्था की गई है और कोविड-19 इस को ध्यान में रखते हुए ही भक्तों को मंदिर में दर्शन के लिए भेजा जा रहा है।

“करणी माता की जय ”

अपने विचार।
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सुख का सागर हिलोरे मारे,
दुख में होता बेहाल।
सुख दुख तो दोनों भाई है,
क्यों करता है मलाल।

विद्याधर तेतरवाल, मोतीसर।

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