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बांसवाड़ा

3 पुरो की मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर जहाँ दिन में तीन बार रूप बदलती माँ, देख के रह जाओगे हैरान

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maa tripura sundari banswara

आज हम आपको कहानी बताएंगे बांसवाड़ा (Banswara) से 16 किलोमीटर और तलवाड़ा गांव (Talwara Village) से केवल 5 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद त्रिपुरा सुंदरी माता मंदिर (Tripura Sundari Mata Mandir) की। त्रिपुरा सुंदरी माता मंदिर रौल श्रंखलाओं के सघन हरियाली की गोद में समाया हुआ है।

त्रिपुरा सुंदरी माता मंदिर बेहद खास मान्यता वाला मंदिर है। इस मंदिर का नाम त्रिपुरा सुंदरी, माता के दिन में तीन बार स्वरूप बदलने के कारण पड़ा, जिसकी पूरे विश्वभर में प्रसिद्धि है

कभी थे 3 किले

त्रिपुरा सुंदरी माता के मंदिर के आसपास कभी 3 के लिए हुआ करते थे। वही मंदिर के आसपास कभी तीन पूरियां थी जिनमें शक्ति पुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी थी। उन्हीं के यहां स्थित होने के कारण मंदिर का नाम त्रिपुरा पड़ा था। मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण तीसरी सदी में हुआ था। वही गुजरात मालवा और मारवाड़ के शासक यहां माता की उपासना किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि गुजरात के राजा की ईष्ट देवी त्रिपुरा सुंदरी माता थी। वही सिद्धराज जयसिंह की भी ईष्ट देवी सुंदरी माता थी।

मंदिर की है यह मान्यता

त्रिपुरा सुंदरी माता मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां मालव नरेश जगदीश परमार ने मां के चरणों में शीश काटकर अर्पित का दिया था। जिसके बाद उसी समय राजा सिद्धराज की प्रार्थना पर मां ने जगदीश को पुनर्जीवित कर दिया था। वही कहते हैं कि तीसरी सदी के आसपास पंचाल जाती के चंदा भाई लोहार में मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।

खान हो गई नष्ट

त्रिपुरी सुंदरी माता मंदिर के समीप एक खदान थी। एक समय यहां लोहे की खदान हुआ करती थी। बताया जाता है कि एक बार त्रिपुरा माता रूप बदल कर भिखारन के रूप में लोहारों के पास पहुंची थी। जिसके बाद लोहारों ने उन पर ध्यान नहीं दिया था। तब मां ने क्रोध में आकर श्राप देकर उस खदान को नष्ट कर दिया था। जिसके बाद पंचालो ने ही माता के मंदिर का जीर्णोद्धार कर उसे बनवाया था।

खुदाई में मिला शिवपरिवार

साल 1982 की खुदाई में इस मंदिर के नीचे से शिव परिवार में मिला था। उसको लेकर भी एक मान्यता है कहा जाता है कि दक्ष यज्ञ तहस नहस हो जाने के बाद शिव जी ने सती को कंधे पर लेकर तांडव किया था। जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर खंड खंड कर दिया था। बाद में सती के शरीर के अंश 51 जगह पर गिरे थे। एक अन्श आकर त्रिपुरा माता मंदिर जहां है उस जगह आकर गिरा था और इसी वजह से यहां त्रिपुरा सुंदरी माता मंदिर है।

बड़े बड़े नेता समेत आते है कई हजार लोग

वही त्रिपुरा सुंदरी माता मंदिर आम जनों के साथ बड़े-बड़े नेताओं के बीच भी प्रसिद्ध है। यहां दूर-दूर से हजारों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। नवरात्रों में माता मंदिर में विशेष भीड़ होती है। माता की प्रतिमा 18 भुजाओं वाली है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) समेत, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, हरिदेव जोशी,वसुंधरा राजे,राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी दर्शन करने गए थे। कहते हैं कि साल 1982 में अटल बिहारी वाजपेयी जब दर्शन करने के लिए गए तब उन्होंने त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर बदलकर त्रिपुर सुंदरी माता मंदिर करने की बात कही थी।

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