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बाड़मेर

बाड़मेर : थार में फैला राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा जिला जिसकी परमार शासक राव बाहड़ ने रखी थी नींव

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 बाड़मेर जिला भारत के सबसे पश्चिमी जिलों में से एक है जिसकी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान लगती है। यह थार के भूभाग में फैला राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा जिला है। बाड़मेर क्षेत्र को शुरुआती काल में मालानी के नाम से जाना जाता था जो कि यहां के संत रावल मल्लीनाथ के नाम पर पड़ा था. आइए जानते हैं बाड़मेर का क्या इतिहास रहा है।

बाड़मेर की स्थापना 13वीं शताब्दी के करीब जूना के परमार शासक राव बाहड़ ने की थी जिनके नाम पर ही यहां का नाम बाड़मेर पड़ा। बाड़मेर सांस्कृतिक व ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध है। जूना की पहाड़ी पर ही राव बाहड़ ने छोटे किले का निर्माण करवाया जिसे बाड़मेर गढ़ के नाम से जाना जाता था।

जूना वर्तमान बाड़मेर शहर से नज़दीक पड़ता है जहां पूर्व में परमारों का शासन रहा तत्पश्चात चौहान राजवंश ने यहां पर आधिपत्य कर लिया। आज जूना में ज्यादातर चौहानों के वंशज रहते है। जूना भौगोलिक नज़र से विशालकाय पहाड़ियों और धोरों के मध्य में इस तरह स्थित है कि दूर से अंदाजा लगाना मुश्किल होगा कि इन पहाड़ों के पार कोई रहता होगा।

समय के साथ धीरे-धीरे मल्लीनाथ के पौत्र रावत लूंका ने अपनी मातृभूमि के लिए लड़ना शुरू किया व रावल मंडलीक की सहायता से जूना के चौहान शासक राव मूंधा को परास्त कर जूना जीत लिया तथा समस्त बाड़मेर क्षेत्र राठौड़ वंश के अधीन कर लिया जिसके उपरांत उसने जूना को ही अपनी राजधानी बना लिया।

दसवीं सदी के अंत तक समस्त पश्चिमी क्षेत्र में जालौर से बाड़मेर व किराडू तक परमार राजवंश शासन में था लेकिन उसके बाद उसका पतन शुरू हुआ व दो-तीन सौ साल के काल में उनका सब कुछ लूट गया।

रावत लूंका के बाद यहां पर राठौड़ राजवंश का ही शासन रहा। आजादी के बाद राजतंत्र समाप्त हो गया लेकिन सभी की जागीरें बची रही और उनकी औपचारिकता आज भी होती है। 1606 ईस्वी में शासक रावत भीम ने नवीन बाड़मेर शहर को बसाया तथा अपनी राजधानी को भी जूना से बाड़मेर स्थांतरित कर दिया।

रावत भीम सबसे प्रतिष्ठित शासकों में से एक थे। बाड़मेर की पहाड़ी पर उन्होंने किला बसाया जिसका कुछ रूप अभी भी शेष है तथा ऊपर की तरफ वर्तमान में गढ़ मंदिर बना हुआ है। 7 अप्रेल 1948 को भारत सरकार द्वारा बाड़मेर को राजस्थान के नए जिले के रूप में मान्यता मिली यह राजस्थान का दूसरा तथा भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से 5वां सबसे बड़ा जिला है। प्राचीन बाड़मेर वर्तमान शहर के नजदीक जूना गांव में पड़ता है। बाड़मेर के मेले, त्योंहार, किले, मंदिर तथा संस्कृति सब समृद्ध है।

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