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बाड़मेर

महिलाओं की तक़दीर बदलने वाली ‘रूमा देवी’ का घूंघट से निकल कर रैंप वॉक तक का सफर, दुनिया में किया नाम

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हम पहले भी आपको कई कहानियों में यह बता चुके हैं, कि पढ़ाई लिखाई से नहीं हुनर होने से भी दुनिया को जीता जा सकता है। आपके अंदर कोई हुनर कोई,टैलेंट है तो आप उस आत्मविश्वास से दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर सकते हैं। दुनिया पर राज करने के लिए डिग्री की नहीं, दिमाग की जरूरत होती है। आज हम आपको ऐसी ही एक कहानी बताएंगे। आज की कहानी है रूमा देवी की, रावतसर बाड़मेर राजस्थान की रूमा देवी की कहानी बड़ी ही प्रेरणा देने वाली है।

उनका जन्म 16 नवंबर 1989 को हुआ। मात्र 17 वर्ष की उम्र में उनकी शादी हो गई। लेकिन उन्होंने अपनी दादी से एक हुनर सीख लिया, हुनर था कढ़ाई का काम करना। जिसके बाद उन्होंने इसी को अपना जीवन चलाने का जरिया बना लिया। 2006 में गांव की 10 महिलाओं ने एक समूह बनाया। जिसमें 10 महिलाओं ने ₹100 प्रति महिला मिलाकर के काम करना शुरू किया। जिसमें वह लोग कुशन, बैग बनाने के लिए कपड़ा,  धागा, प्लास्टिक व पेपर लाई और उन्हें बनाना शुरू कर दिया। बाड़मेर में ग्रामीण विकास चेतना संस्थान तक ले गई।

जिसके बाद साल 2008 में रूमा देवी भी इस संस्थान की सदस्य बन गई और साल 2010 में उन्हें इस एनजीओ का अध्यक्ष बना दिया गया। जिसके बाद उनकी पहली प्रदर्शनी दिल्ली के रफी मार्ग पर हुई। जिसके बाद रूमा देवी ने ना रुकने और ना थकने का प्रण ले लिया और दुनिया में अपना नाम करना शुरू कर दिया। 2016 में राजस्थान हेरिटेज वीक में भी अपने हुनर को दिखा चुकी है। उसमें भी उन की कढ़ाई और उनके टैलेंट की प्रदर्शनी हो चुकी है।

कई पुरस्कारों से हो चूंकि हैं सम्मानित

रूमा देवी को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें साल 2018 में भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। साल 2019 में उन्होंने अमिताभ बच्चन के टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में सोनाक्षी सिन्हा के साथ मंच साझा किया है। उन्हें अखिल भारतीय सम्मेलन में 2016 में सम्मानित किया जा चुका है। वहीं हावर्ड यूनिवर्सिटी बोस्टन यूएस में भी उन्हें आमंत्रित किया जा चुका है। साल 2019 में वह टीएफआई डिजाइनर का भी खिताब जीत चुकी है। वहीं श्रीलंका की सरकार द्वारा भी उन्हें शिल्पा अभिमन्यु अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं विंग्स नीदरलैंड पर महिलाएं द्वारा भी 2016 में उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

रूमा देवी इस समय में 75 गांव की 22000 महिलाओं को नौकरी दे चुके हैं। सभी महिलाएं साड़ी, बेडशीट, कुर्ता आदि तैयार करती है। रूमा देवी सोशल मीडिया पर भी पूरी तरीके से सक्रिय रहती हैं। वही निधि जैन द्वारा लिखी किताब हौसलों का हुनर रूमा देवी की कहानी पर ही केंद्रित है।

रूमा देवी वाकई इस देश में एक बेहतरीन उदाहरण है पिछड़े जिले बाड़मेर से भी उठ कर उन्होंने दुनिया में अपना नाम किया है। साथ ही 22000 परिवारों के आज पालन पोषण में कहीं ना कहीं वह हिस्सेदार है। उमा देवी की इस संघर्ष भरी कहानी से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। हम भी रूमा देवी के हुनर को सलाम करते हैं। वह आज देश की जानी मानी हस्तकला की कारीगर हैं। उन्होंने भारत की पारंपरिक हस्तकला को जिंदा रखा हुआ है।

राजस्थान की आन बान शान, रूमा देवी को झलको की टीम का सलाम।

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