बाड़मेर: भारत-पाक युद्ध में रेलवे के वो 17 अनसंग हीरोज़ जिन्होंने सेना के लिए दे दी थी जान

Barmer Unsung HeroesNews: सन् 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश के शूरवीरों ने पाक सेना के दांत खट्टे कर डाले थे। राजस्थान-पाकिस्तान सीमा पर राज्य के सीमावर्ती जिले भी प्रभावित हुए थे। उस वक्त सिंतबर ही चल रहा था, जब देश के जांबाज पाकिस्तानी दुश्मन को अपने पराक्रम का दमखम दिखा रहे थे। लगभग 22 दिन चले इस युद्ध में भारतीय सेना के 3,000 जवानों ने अपनी शहादत दी थी। लेकिन गौरतलब है, इस युद्ध में 17 ऐसे रेलवे कर्मचारी भी थे, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना बलिदान दिया था। आज हम आपसे इन्हीं अनसंग हीरोज़ (Barmer Unsung Heroes in Indo pak War) की बात करेंगे, जिन्होंने भारतीय सेना के एक मिशन को अंजाम पर पहुंचाते हुए इसी दिन यानी 9 सिंतबर को पाकिस्तानी एयरफोर्स के बम धमाकों को नाकाम कर दिया था।

इन 17 रेलवे कर्मचारियों के सम्मान में गडरा रोड रेलवे स्टेशन (Gadra Road Railway Station) पर स्मृथि स्थल भी बनाया गया है। इन्हीं में शामिल एक बहादुर कर्मी  फायरमैन माधोसिंह थे, जो महज विवाह के 20 दिन बाद ही शहीद हो गए थे। उनकी वीरांगना आसीदेवी की उम्र उस वक्त महज 15 साल थी। हर साल जब 9 सिंतबर आती है, तब आसीदेवी के सामने वे भयावह तस्वीरें आ जाती हैं, जब उन्होंने वह अपने पति को खोया था।

railway line

सन् 1965 में भारत-पाक युद्ध बेहद खतरनाक था। चारों और टैंकों की आवाज, लड़ाकू विमानों द्वारा बमबारी, चलती गोलियों की लगातार आवाजें, जनता के हौसले परास्त कर रहे थे। लेकिन भारतीय सेना पूरी बहादुरी के साथ पाकिस्तानी सेना की आंख में आंख डाल लड़ रही थी। इसी बीच भारतीय सेना से घबराए पाकिस्तान ने युद्ध सामग्री और खाद्य सामग्री पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभा रही गडरा रेलवे लाइन के पास रोड पर बम गिरा दिए, जिससे वह मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। अब भारतीय सेना के पास हथियार सहित अन्य सामग्री नहीं पहुंच सकती थी, क्योंकि सप्लाई लाइन टूट चुकी थी। सेना के लिए यह एक बड़ी मुश्किल थी।

ऐसे मुश्किल वक्त में भारतीय रेलवे के कर्मचारी आगे आएं और उन्होंने रेल लाइन को ठीक करने की ठानी तथा अपने इस मिशन पर मुस्तैदी से लग गए। इस बीच पाक सैनिक भारतीय रेल कर्मचारियों के इस काम को नाकाब करने के मंसूबे से विमान द्वारा बमबारी करने लगे। इस बमबारी में रेलवे के 17 कर्मचारी शहीद हो गए। लेकिन अन्य कर्मचारियों के हौसले डिगे नहीं और वह अनवरत काम करते रहें और आखिर में उन्होंने रेलवे लाइन को दुरुस्त कर दिया जिसके बाद सप्लाई में लगी ट्रेन को तुरंत रवाना किया गया, जिसके बाद भारतीय सेना को समय रहते हथियार और अन्य जरूरत भरी सामग्री मुहैया करवाई गई।

Barmer

इस क्रम में बाड़मेर के अमीरपुरा (Amirpura) निवासी फायरमैन माधोसिंह भी शहीद हुए थे, उनकी 17 अगस्त 1965 को शादी हुई थी और वह 9 सिंतबर को देश के लिए शहीद हो गए, उनकी वीरांगना आसीदेवी कहती हैं कि उन्हें अपने पति पर गर्व है, जिन्होंने अदम्य साहस रख देश की सुरक्षा में अपना योगदान दिया। वहीं, इन शहीदों के नाम पर स्टेशनों के नाम रखे जाए तथा वहां उनकी  प्रतिमाएं लगाई जाएं, ऐसी भी जनता द्वारा मांग उठती रही है। शहीदों के परिजनों की मांग है कि रेलवे कर्मचारियों के इन 17 शहीदों के नाम पर ट्रेन भी चलवाई जाए।

रेलवे कर्मचारियों की याद तथा सम्मान में 9 सिंतबर को मेला लगता है, जिसमें उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। इन 17 कर्मचारियों में नंदराम गैंगमैन, मुल्तानाराम पेंटर, भंवराराम कांटेवाला, करनाराम ट्रॉलीमैन, मालाराम गैंगमैन, हेमाराम खलासी, मघाराम गैंगमैन, रावताराम गैंगमैन, हुकमाराम गैंगमैन, लालाराम गैंगमैन, चिमाराम गैंगमैन, खीमराज गैंगमैन, देव सिंह खलासी, जेहाराम गैंगमैन, चुन्नीलाल ड्राइवर, चिमन सिंह फायरमैन (Barmer Unsung Heroes in Indo pak War) व माधोसिंह फायरमैन शामिल थे। उनकी शहादत को झलको परिवार नमन करता है।

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