धोरो के लाल आईएएस गंगा सिंह की गाँव से निकल IAS बनने तक के सफर की कहानी, दादा का सपना किया पूरा

हम आज आपको एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताएंगे जिसने अपनी मेहनत और लगन से छोटी सी उम्र में देश के उच्च पदों में से एक पद पर नौकरी पाकर देश की सेवा करने का निर्णय कर लिया। आज की कहानी राजस्थान के पिछड़े जिलों में से माने जाने वाले बाड़मेर के रहने वाले गंगा सिंह की। गंगा सिंह की कहानी इसलिए खास है क्योंकि वह मात्र 23 साल की उम्र में आईएएस गंगा सिंह बन गए।

गंगा सिंह शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थे, वह हमेशा किताबों से प्रेम करते थे और नया सीखने की हमेशा से इच्छा रखते थे। उन्होंने दसवीं कक्षा में स्कूल में टॉप किया और 12वीं कक्षा में भी उन्होंने स्कूल में टॉप कर के साथ ही जिले में छठवां स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने जोधपुर के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय से बीएससी में डिग्री हासिल की, फिर दिल्ली आ गए। दिल्ली जाने से पहले उनके माता-पिता ने उन्हें यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रेरणा देना शुरू कर दिया।

उनके पिता ने उन्हें कहा कि वह यूपीएससी परीक्षा के लिए मेहनत करें और एग्जाम दे। उनके पिता ने कहा कि उनको अपने बेटे पर भरोसा है कि वह यूपीएससी का एग्जाम जरूर पास कर लेगा। बीएससी की पढ़ाई करने के बाद में गंगा सिंह दिल्ली आ गए और जेएनयू में एडमिशन ले लिया। दाखिला लेने के बाद एमए हिंदी कि वह पढ़ाई करने लगे।
उसके साथ पिता की बात को दिमाग में रख कर के यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने लगे। साहित्य हिंदी को उन्होंने अपना विषय बनाया और पढ़ना शुरू कर दिया। पहली बार जब उन्होंने परीक्षा दी तो वह असफल हो गए। जिसके बाद उन्होंने अपना आत्मविश्वास और अधिक बढ़ाया और दोबारा से पढ़ाई करना शुरू कर दिया।

दोस्तों के साथ पढ़ते तथा उनके सहपाठी भी उन्हें सिविल परीक्षा के लिए प्रेरणा देते। वह लोग भी गंगा सिंह के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी करते और उन्हें उम्मीद दिखाते कि वह जरूर दूसरी बारी में इस परीक्षा को पास कर लेंगे। बस इतना ही काफी तक गंगा सिंह के लिए उन्होंने सभी के आत्मविश्वास और बड़ों के आशीर्वाद के साथ 2016 में एक बार फिर परीक्षा दे डाली। 2016 में परीक्षा दी और मात्र 23 साल की उम्र में वह बन गए आईएएस गंगा सिंह।

दूसरी बारी में ही उन्होंने सिविल परीक्षा को पास कर लिया। भारत में उन्होंने 33वी रैंक हासिल की। आपको बताते चलें कि यूपीएससी की परीक्षा दुनिया की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। माना जाता है कि भारत का सबसे कठिन और दुनिया में दूसरा सबसे कठिन एग्जाम कोई है तो वह यूपीएससी है। लेकिन गंगा सिंह के आत्मविश्वास और उनकी मेहनत ने दूसरी बारी में ही इस परीक्षा को पार कर लिया। 2017 में गंगा सिंह गुजरात कैडर के अधिकारी बन गए।

युवाओं को दिया बेहतरीन सन्देश

अपनी सफलता के पीछे गंगा सिंह बताते हैं कि उन्होंने दोस्तों के साथ ग्रुप स्टडी की थी। वह बताते हैं कि इस मुश्किल परीक्षा को पास करने के लिए समूह पढ़ाई यानी ग्रुप स्टडी बहुत जरूरी है। इसमें आपको अपने पढ़ाई के साथ-साथ औरों का ज्ञान भी मिलता है,जो और लोग पढ़ चुके हैं उसके बारे में जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि वह वर्तमान मामलों पर नजर बनाते थे यानी जो उस समय में घट रहा है उस पर नजर बनाते थे। वह हर छोटी से छोटी जानकारी को इकट्ठा करते थे। उन्होंने कहा कि तमाम तरह के इंस्टीट्यूट मॉक टेस्ट यानी मॉक इंटरव्यू भी लेते हैं। उसमें भी वह भाग लिया करते थे। हालांकि मॉक इंटरव्यूज यूपीएससी के असल इंटरव्यू से थोड़ा सा अलग होते हैं, लेकिन मॉक इंटरव्यू उस में भाग लेने से परीक्षार्थी का आत्मविश्वास बढ़ता है।

परीक्षा को पास करने के लिए वह युवाओं को संदेश देते हैं, कि सबसे जरूरी है कि आप लोग नोट्स बनाएं। हर छोटी से छोटी बात का नोट बनाए जिससे आप कभी भी पढ़ सकते हैं। साथ ही बार बार रिवीजन करना जरूरी है, रिवीजन करने से आप जो पढ़ चुके हैं वह आपके दिमाग में बैठ जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा को पास करने के लिए स्पीड और लिखावट में सुधार करना बेहद जरूरी है। क्योंकि परीक्षा में आपको एक सीमित समय मिलता है और उस सीमित समय में आपको हर प्रश्न का सही और बेहतर ढंग से उत्तर देना होता है। यह सब आपकी स्पीड और लिखावट पर निर्भर होता है।

गंगा सिंह बताते हैं कि उनके इंटरव्यू के दौरान उनसे एक बेहतरीन और रोचक सवाल पूछा गया इंटरव्यू लेने वाले एक्सपर्ट्स ने उनसे पूछा कि क्या आप भारत में आज भी काले और गोरे रंग का भेद होता है! अगर हा तो भारत कैसे लोकतांत्रिक देश हैं।

इस पर गंगा सिंह ने जवाब दिया हा, आज भी देश में रंगभेद होता हैं। गंगा सिंह ने कहा कि भारत में आज भी काले रंग और गोरे रं’ग का भेद होता है। ट्रक के पीछे एक स्लोगन लिखा रहता है, कि बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला जिसका सीधा अर्थ है कि जिसका रंग काला होता है वह बुरी नजर का होता है। गंगा सिंह ने आगे कहा कि भारतीय फिल्मों में कई ऐसे गाने हैं जो काले रं’ग के भेद पर बने हैं, जो साबित करते हैं कि भारत में आज भी कहीं ना कहीं काले और गोरे रं’ग का भेद होता है। उनके इस जवाब से एक्सपर्ट्स खुश हो गए।

इंटरव्यू पास करके बाड़मेर का गंगा बन गया आईएएस गंगा सिंह। गंगा सिंह की कहानी हम सबको प्रेरणा देती है। हम सभी को उनसे सीख लेनी चाहिए। आप एक बार जरूर अपने लक्ष्य में फेल हो जाए,लेकिन दूसरी बार दोगुनी मेहनत के साथ और लगन के साथ उस लक्ष्य को पा सकते हैं।

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