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बाड़मेर

दसवीं कक्षा में फेल होने वाला बन गया आईपीएस, IPS जगदीश बांगडवा का न हार मानने वाला जज्बा

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आज आपको राजस्थान के एक छोटे से गांव के उस लड़के की कहानी बताएंगे जिसने असफलताओं के बाद भी सफलता को पा लिया। हिंदी फिल्म का एक डायलॉग है कि किसी चीज को अगर शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात आपकी उससे मिलाने में लग जाती है। शायद इसी चीज को संभव किया है राजस्थान बाड़मेर के गांव बायतु कस्बे के रहने वाले जगदीश बांगडवा ने। जगदीश राजस्थान बाड़मेर जिले के रहने वाले हैं, जगदीश का जन्म एक किसान परिवार में हुआ।

जगदीश ने बाड़मेर के बाल मंदिर बायतु से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। जगदीश के जीवन के बारे में बताएं तो जब दसवीं कक्षा में थे तो फेल हो गए थे। वे बताते हैं कि किसी मेडिकल कारणों की वजह से वह परीक्षा नहीं दे पाए और दसवीं कक्षा को उन्होंने दो बार में पास किया। इसके बाद उन्होंने साइंस मैथ को अपना विषय चुन लिया। लेकिन जगदीश 12वीं कक्षा तक आते-आते पहचान गए कि गणित को पढ़ना उनके लिए ज्यादा मुश्किल है। जगदीश आगे बताते हैं कि 12वीं कक्षा में गणित में उन्हें केवल 38 नंबर मिले थे। किसी विषय को पास करने के लिए 33 न्यूनतम नंबरों की आवश्यकता होती है और जगदीश को केवल 5 अंक ज्यादा यानी 38 अंक मिले थे।

लेकिन यह सब नही जगदीश का सपना तो कुछ और ही था। वह अपने जीवन में कुछ और हासिल करना चाहते थे। जगदीश ने सबसे पहले आरएएस एग्जाम पास किया। यह एग्जाम राजस्थान राज्य की परीक्षा है। आरएएस परीक्षा को पास करने के बाद जगदीश ने 2018 में यूपीएससी की परीक्षा दी। यूपीएससी में उन्हें 486वा अंक हासिल हुआ। इसके बाद दसवीं कक्षा में फेल होने वाला जगदीश बन गया आईपीएस जगदीश बांगडवा।

महिलाओं के लिए करना चाहते है काम : जगदीश बताते हैं कि वह बतौर आईपीएस मारवाड़ में महिलाओं की शिक्षा के लिए काम करना चाहते हैं। वे कहते हैं कि मारवाड़ में आज भी महिला को शिक्षा के मामले में कब में पढ़ाया जाता है। इसके लिए वह काम करना चाहते हैं तो कहते हैं, महिला सशक्तिकरण के लिए देश में काम करना बेहद जरूरी है। इस देश में पुरुष और महिला बराबर का दर्जा रखते हैं। इसके लिए जगदीश बतौर आईपीएस काम कर रहे हैं।

जगदीश की कहानी वाकई उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो असफलताओं के बाद जीवन से हार जाते हैं। जगदीश दो बार असफलता के बाद भी जीवन में नहीं हारे और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहे। दसवीं कक्षा में एक बार फेल होने के बावजूद भी वह आज आईपीएस अफसर बन गए। उनकी कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है।

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