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बाड़मेर

पश्चिमी राजस्थान के प्रसिद्ध फौजी परिवार का एक और हीरा, जानें कैसे प्यारी चौधरी बनी लेफ्टिनेंट

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हमारे भारतीय समाज की जड़ें ऐसी हैं कि सदियों से यहां बेटे और बेटी में फर्क किया गया है, बेटी को हमेशा से ही बेटे से कमतर माना गया है लेकिन कुछ माता-पिता ऐसे होते हैं जो उसी समाज के सामने नई नजीर पेश करते हैं।

ऐसे ही हैं बाड़मेर के किस्तूराम और अणसी देवी जिन्होंने अपनी बेटी प्यारी चौधरी को इस काबिल बनाया कि आज प्यारी ने भारतीय सेना  में पश्चिमी राजस्थान की पहली महिला लेफ्टिनेंट बनकर नया कीर्तिमान रचा है। प्यारी अपने परिवार से भारतीय सेना में जाने वाली छठी सदस्य हैं।

बाड़मेर जिला मुख्यालय से 29 किलोमीटर दूर गांव राऊजी की ढाणी काउखेड़ा की रहने वाली प्यारी का भारतीय सेना की मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन हुआ है।

भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर 47 आर्म्ड रेजिमेंट में तैनात किस्तूरा राम चौधरी की बेटी ने राजस्थान का नाम रोशन करते हुए अपने पिता से ऊपर की रैंक हासिल की है। बेटी की सफलता पर पिता कहते हैं कि, मैं उन सभी मां-बाप से कहना चाहूंगा जो अपनी बेटियों को नहीं पढ़ाते हैं, और उनके सपनों को चकनाचूर कर देते हैं, अब समय बदल गया है, अब बेटियां आगे आएंगी।

ऑल इंडिया मैरिट के आधार पर हुआ प्यारी का चयन

 

31 दिसम्बर 1997 को पैदा हुई लेफ्टिनेंट प्यारी चौधरी ने अपनी शुरूआती पढ़ाई पटियाला के आर्मी नर्सरी स्कूल से पूरी की जिसके बाद पिता की नौकरी में होने वाले तबादलों के चलते देश के कई इलाकों में केंद्रीय व सैनिक स्कूल से शिक्षा हासिल की। स्कूल के बाद प्यारी ने महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से बीएससी नर्सिंग की डिग्री हासिल की।

कॉलेज के बाद प्यारी ने भारतीय सेना में कमीशन पाने के लिए ऑल इंडिया लेवल पर लिखित परीक्षा दी जिसमें इंटरव्यू व मेडिकल टेस्ट में सफलता हासिल करने के बाद उनका मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट पद पर चय़न हुआ।

आर्मी अफसरों के परिवार में हुआ पालन-पोषण

प्यारी ने घर में शुरू से ही सेना के लिए काम करने का माहौल देखा है, वहीं उनकी रगों में भी आर्मी जवान का खून दौड़ता है। अपने सेना के प्रति इस लगाव को बढ़ाते हुए प्यारी ने आगे चलकर सेना में कमीशन पाया।

माता-पिता ने हमेशा दिया साथ

प्यारी आज अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहती है कि उन्होंने मुझे कभी भी कुछ करने से नहीं रोका। जिंदगी के हर पड़ाव पर मेरे पिता साये की तरह मेरे साथ खड़े रहे।

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