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बाड़मेर

पेट पालने के लिए चराते थे बकरियां, लालटेन की रोशनी में पढ़कर अब बने आरएएस अफसर

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जिस व्यक्ति ने सफलता हासिल करने की ठान ली होती है वह एक दिन अपनी मंजिल तक जरूर पहुंचता है चाहे गरीबी, पारिवारिक परिस्थितियां उसकी राह में कितनी ही बाधा पहुंचाए।

आज हम एक ऐसे ही शख्स की बात करेंगे जिसने अपना बचपन गरीबी में बिताया लेकिन मेहनत के दम पर 2018 में देराज राम दुगेर राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर में आरएएस अधिकारी बने।

एक वक्त ऐसा था जब देराज राम दुगेर दो वक़्त की रोटी के लिए भेड़-बकरियां चराते थे लेकिन लालटेन और चिमनी की रोशनी में पढ़ाई कर आखिर एक दिन अपना सपना पूरा किया।

बचपन में देखा था RAS बनने का सपना

राजस्थान के सरहदी इलाके बाड़मेर से 38 किलोमीटर बसे बायतु जिले के कानोड़ गांव के रहने वाले देराज राम दुगेर ने अपना बचपन तमाम अभावों में पूरा किया। देराज खुद बताते हैं कि कभी वह बकरियां चराया करते थे तो कभी अखबार बांटते थे लेकिन कुछ करने का सपना उनके मन में हमेशा से था।

देराज के परिवार की बात करें तो उनके पिता कानोड़ मगाराम हैं और मां का नाम केसी देवी है। देराज अपने पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। देराज के भाई भी अभी यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।

लालटेन की रोशनी में करते थे रातभर पढाई

देराज लालटेन और चिमनी की रोशनी में शुरूआती दिनों से पढ़ाई करते थे, वहीं कुछ समय बाद तीन हजार में उन्होंने सोलर लालटेन खरीदा। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2019 में देराज के घर में बिजली आई। देराज राम दुगेर को अपने तीसरे प्रयास में आरएएस परीक्षा में सफलता मिली।

आरएएस से पहले तीन अन्य परीक्षाओं में पाई सफलता

देराज 2016 से आरएएस के लिए प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफलता उन्हें 2018 में मिली जिसमें उन्हें 302वीं रैंक हासिल की। इससे पहले देराज ने 2011 में राजस्थान पटवारी भर्ती परीक्षा और उनका चयन तृतीय श्रेणी शिक्षक पद पर भी हो चुका है।

   
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