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भीलवाड़ा

क्यारा के बालाजी का अलौकिक मंदिर जहाँ होती है भक्तों की हर इच्छा पूरी पढ़ें चमत्कारिक कहानी

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हनुमान जी महाराज का अलौकिक मंदिर।
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जीव जन्मों की साधना,
यह ईश्वर की अनुपम भेंट।
कुछ क्षण हनुमान पधारे,
असंख्य कबूतर परमानेंट।

दोस्तों नमस्कार

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे मंदिर की चमत्कारीक कहानी बताने जा रहा हूं। जो कबूतरों का खजाना है, और स्वरोजगार देने में युवाओं का एकमात्र केंद्र है। भीलवाड़ा से दो किलोमीटर की दूरी पर पुर नामक स्थान पर यह क्यारा के बालाजी का मंदिर।

मंदिर की स्थापना।
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दीप से बात करते हुए मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर हजारों साल पुराना मंदिर है। एक अन्य घटना के अनुसार जब रावण के द्वारा सीता जी का अपहरण हो गया था, उस समय सीता जी को ढूंढते ढूंढते कुछ क्षण के लिए हनुमान जी महाराज यहां रुके थे।

जब हनुमान जी महाराज कुछ क्षण के लिए यहां रुके थे,तो उनकी आकृति चट्टान के ऊपर वैसी की वैसी उभर के आ गई। पहले यह मंदिर चारों तरफ से खुला हुआ था। 1994 के बाद यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ और यह चारों तरफ से बंद हो गया है। इस मंदिर में एक और अचंभे में डालने वाली बात यह है कि यहां पर लाखों की तादाद में अनेकों प्रकार के कबूतर रहते हैं। कबूतरों का दाना बहुत समय पहले एक मुट्ठी से शुरू किया था जो आज पांच क्विंटल प्रतिदिन की खपत पर पहुंच गया है।

हनुमान जी की मूर्ति के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि यह स्वयंभू आकृति है जो अपने आप प्रकट हुई है।

स्वरोजगार हनुमान जी।
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पुजारी जी ने बताया कि यहां की मान्यता के अनुसार जो भी यहां अपनी जो इच्छा लेकर आता है उसकी इच्छा पूर्ति होती है।इस हनुमान जी को स्वरोजगार हनुमान जी भी कहते हैं। यह मंदिर भीलवाड़ा वालों की तथा नव युवकों की पहली पसंद है। यहां पर आपको किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं मिलेगी।

उन्होंने बताया कि यहां पर किसी भी प्रकार की गलत गतिविधियां नहीं मिलेगी। यहां जो भी आता है वह मानसिक शांति और अपनी मन्नत पूरी करने हेतु आता है। यहां पर एक भक्त ने 51 क्विंटल पत्थर की एक गदा,अपनी मन्नत पूरी होने पर बनवाई थी।जो यहां का एक आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अनेकों प्रकार के कबूतर और तरह-तरह के पक्षियों के लिए यहां दाना पानी और रहने के लिए धर्मशाला का पूरा प्रबंध है।

क्यारा के बालाजी का मंदिर भीलवाड़ा के पास में स्थित है। यहां पर भारत के चारों कोणों से दर्शनार्थी दर्शन कर लाभान्वित होते हैं। दो तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थापित इस मंदिर में जाने हेतु टेंपो, बस,या निजी साधन के द्वारा किसी भी प्रकार से जाया जा सकता है।

अन्य।
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पर्यावरण की अलौकिक शांति प्रदान करने वाला यह स्थान हजारों वर्षों से अपने होने का सबूत दे रहा है। शीला के ऊपर हनुमान जी की अलौकिक शक्ति वाली तस्वीर तथा जीव जंतुओं का अनुपम खजाना तथा पर्यावरण का सुंदर दृश्य।

अपने विचार।
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जीवन सबका एक सा,
समझो यहां पर आए।
कष्ट किसी को देना नहीं,
जीव सभी में समाए।

विद्याधर तेतरवाल ,
मोतीसर।

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