भीलवाड़ा में वर्जिनिटी टेस्ट में फेल हुई विवाहिता तो पंचायत ने लगा दिया 10 लाख का जुर्माना!

21वीं शताब्दी में जहां दुनिया कामयाबी और उन्नति के नए आयाम छू रही है। वहीं, भारत दकियानूसी और रूढ़िवादी परंपराओं के फेर में पड़ा हुआ है। ऐसी शर्मनाक परंपराएं और कुप्रथाएं देश को न केवल पीछे घसीट रही हैंं, बल्कि महिलाओं के शोषण और प्रताड़ना में भी कोई कमी नहीं छोड़ रहीं। महिलाओं से जुड़ा एक घिनौनी प्रथा का मामला राजस्थान के भीलवाड़ा (Bhilwara) सेआया है। यहां कौमार्य परीक्षण (Victim of virginity test in Bhilwara)के नाम पर विवाहित युवती को प्रताड़ित किया गया है।

शर्म की बात है कि यहां कौमार्य परीक्षण (कुकड़ी प्रथा) जैसी कुप्रथा ने महिला को न केवल शर्मसार किया है, बल्कि 10 लाख रुपए का जुर्माना लगा पंचायत ने पीड़िता को प्रताड़िता भी किया है। शहर की युवती से जुड़े मामले में पुलिस ने ससुराल पक्ष तथा खाफ पंचायत में शामिल सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।

kukari pratha

थानाप्रभारी अय्युब खां ने बताया कि पीड़ित युवती ने मामला दर्ज करवाया है। पीड़िता का आरोप है कि दिनांक 11 मई, 2022 को बागोर (Bagore) में उसकी शादी हुई थी। शादी के बाद कुकड़ी प्रथा (Kukari Pratha) के अंतर्गत कौमार्य परीक्षण (Virginity Test) हुआ, इस टेस्ट में वह पास नहीं हो सकी। ससुराल वालों से पूछताछ में उन्होंने बताया कि पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने उसके साथ ब’लात्कार किया। रे’प के मामले में भीलवाड़ा के सुभाषनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई जा चुकी है। इसके बाद ससुराल वालों ने युवती से कौमार्य में फेल होने पर उसके साथ मारपीट की।

ससुराल पक्ष की तरफ से बागोर के एक गांव समाज की खाप पंचायत बुलाकर परिवार पर 10 लाख का जुर्माना लगा दिया है। जुर्माना नहीं देने पर ससुराल वाले परेशान करते रहे। पीड़िता ने पति समेत ससुराल वालों के अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट अधिकारियों को दी थी। मामले में मांडल डीएसपी (DSP) सुरेंद्र कुमार ने निरीक्षण किया। पता चला कि 10 लाख जुर्माना राशि को लेकर युवती और उसके परिजनों को परेशान किया जा रहा था। इस पर बागोर थाने में ससुराल वालों और खाक पंचायत के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।

kukari pratha

वहीं वर्जिनिटी टेस्ट (Victim of virginity test in Bhilwara) को लेकर भीलवाड़ा एमजीएच (MGH) के मेडिकल ज्यूरिष्ठ डॉ. अनुपम बंसल कहते हैं कि यह संभव नहीं है कि टेस्ट में विवाहिता पास हो। खेलते-कूदते समय या चोट लगने पर वर्जिनिटी टेस्ट में रक्तस्त्राव होना जरूरी नहीं है। इस कुप्रथा के आधार पर महिलाओं के चरित्र को जज नहीं किया जा सकता। वहीं, मेडिकल ज्यूरिष्ठ डॉ. अनुपम बंसल कहती हैं कि वर्जिनिटी लोस कई कारणों से हो सकती है। जरूरी नहीं कि पहले से संबंधों का कारण बने। खिलाड़ी के लिए तो यह बिल्कुल भी संभव नहीं है। जन्मजात हॉर्मॉन की कमी या कोई चोट लगने से भी वर्जिनिटी लोस हो सकती है। इस कुप्रथा से महिलाएं शर्मसार होती हैं। इसे समाज में एकजुट होकर खत्म करना चाहिए

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