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बीकानेर

मासिक धर्म पर जागरूकता के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर और 800 लड़कियों ने शुरू की अनोखी पहल

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मासिक धर्म पर अनोखी मुहिम, बीकानेर।
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कर्म करो शर्म नहीं,
शर्म है अभिशाप।
पुण्य कर्म हितकारी है,
ना करना कभी पाप।

घर-घर जाकर महिलाओं को सैनिटरी पैड्स के बारे में बताया।
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दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको बीकानेर की लड़कियों द्वारा चलाई गई अनोखी मुहिम के बारे में बताने जा रहा हूं। जिन्होंने समाज में महिलाओं के लिए एक अनोखी पहल की है। डूंगर कॉलेज बीकानेर के केमिस्ट्री के प्रोफ़ेसर ने सुदेश से बात करते हुए बताया कि मैं राष्ट्रीय सेवा योजना का प्रोग्राम अफसर भी हूं।

आपके मन में यह विचार कैसे आया।
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प्रोफ़ेसर साहब ने बताया कि मै शहरिया कॉलेज कालाडेरा जयपुर में 1997 से लेकर 2000 तक पढ़ा तो वहां पर 1998 मे मैने स्वम सेवक रहकर एनएसएस ज्वाइन की। वहां पर मेरे गुरु ने मेरे दिमाग में समाज के मूल उद्देश्यों को कूट-कूट के भर दिया। उन्होंने बताया कि यह राष्ट्रीय सेवा योजना के अंदर निस्वार्थ सेवा भाव से की जाने वाली योजनाएं हैं। मेरी प्रथम राजकीय सेवा राजकीय डूंगर कॉलेज से शुरू हुई, जिसमें मुझे मेरे प्रिंसिपल ने यह दायित्व दिया। उसी दिन से मैंने इस कार्य को दिल से जज्बे के साथ शुरू किया और इस मुकाम तक पहुंचा है। कोरोना के दौरान बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन हम हमारे कार्य के प्रति सजग और अडिग रहे। उन्होंने बताया कि हर कार्य को करने में समस्याएं आती है, लेकिन उसका समाधान भी है। आत्महत्या कोई समाधान नहीं है।

प्रोफेसर साहब ने बताया की इस प्रोग्राम से जुड़े होने की वजह से गत दो वर्षों में कॉविड के दौरान रेलिया निकालकर समाजोपयोगी कार्य करने की वजह से,जैसे ब्लड बैंक सैनिटरी पैड्स का वितरण और प्रशिक्षण , स्वच्छता अभियान आदि कार्य करने के उपलक्ष में सरकार द्वारा आवेदन पत्र मांगे गए थे। जिसके लिए मुझे अवार्ड हेतु चुना गया है।
इस अवार्ड के मिलने के पीछे राजकीय डूंगर कॉलेज की छात्राओं का विशेष हाथ है।

सोशल युद्ध फाउंडेशन।
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एनएसएस इकाई की अध्यक्षा प्रियंका भारद्वाज के बारे में उन्होंने बताया कि इन्होंने सोशल युद्ध फाउंडेशन संगठन ज्वाइन किया और बीकानेर जिले की अध्यक्षा बनाई गई। इस संगठन का मेन उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और बच्चियों की समस्याओं को दूर करना है।

उस समय प्रियंका ने अपने ऊपर ले कर सोचा कि यह समस्या मेरी नहीं बल्कि सभी महिलाओं की है। उसके बाद में रोबिन्हुड के सहयोग से झुग्गी झोपड़ीयो में जाकर इस कार्य को बड़ा रूप दे दिया। झुग्गी झोपड़ियों मे एक बड़ा प्रोग्राम किया। सभी महिलाओं को सभी के द्वारा समझाया गया।अपने स्वयं की सुरक्षा के प्रति सजग किया। प्रियंका ने बताया कि हमारी आठ सौ लड़कियों की टीम और गुरु जी के द्वारा अलग अलग बांटी गई टीमों के द्वारा पूरे जिले के अंदर हम छः महीने तक सैनिटरी पैड्स फ्री बांटेंगे और सभी को प्रशिक्षित करेंगे।

पड़ोसी सुखी तो हम भी सुखी,
यह बात सदियों पुरानी है।
नारी की सुरक्षा सबकी सुरक्षा,
यह स्वस्थ समाज की कहानी है।

प्रोफेसर साहब ने बताया कि यह समस्या मेरी बहन की, मेरी बेटी की, मेरी मां की, सब की है। इसलिए इसमें संकोच वाली कोई बात ही नहीं है। इसमें सबको और निसंकोच होकर आगे बढ़ना चाहिए सुरक्षित रहना चाहिए।

प्रियंका में इस कार्य के प्रति रुचि किस प्रकार आई के बारे में बताया कि जब मैं डूंगर कॉलेज में आई थी तब एनएसएस ज्वाइन किया और गुरुजी के संपर्क में आने के बाद में मैंने सोचा कि यह समस्या मेरी है, वैसी हर महिला की है। इसलिए मुझे इसके प्रति सजग होकर कार्य करना चाहिए और मैंने किया।उसने बताया कि यह सबसे बड़ी समस्या है, जो हर महिला को हर महीने फेस करनी पड़ती है। इसलिए इस पर काम करना शुरू किया।

उन्होंने बताया कि 18 नवंबर को हमने अगले 6 माह तक लगातार इस कार्य को करने का बीड़ा उठाया है। जिसमें हमारे सर का पूरा सहयोग है, और स्पॉन्सर भी इसके लिए तैयार हैं। घरवालों के सपोर्ट के बारे में पूछने पर प्रियंका ने बताया कि घर वालों का फुल सपोर्ट है और मेरे पापा ही स्पॉन्सर है। झलको बीकानेर के सुदेश ने प्रियंका का बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया और कहा कि अब मैं आपके साथ में कंधे से कंधा मिलाकर इस कार्य को करूंगा और करता रहूंगा।

अपने विचार।
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साक्षर, स्वास्थ्य और सुंदरता,
इनमें सुरक्षा छुपा हुआ।
सेनेटरी पेड्स को जिसने समझा,
वो तो सदा ही देती दुआ।

विद्याधर तेतरवाल ,
मोतीसर।

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